फ़तावा

रोज़े की हालत में औरत के गर्भ अथवा शर्मगाह में कोई चीज़ जांच के लिए दाख़िल करना

सवाल – क्या रोज़े की हालत में बीमारी की मूल्यांकन (तशख़ीस) के लिए औरत के गर्भ (रहम) में कोई चीज़ दाख़िल करने से रोज़ा फ़ासिद हो जाएगा? क्या रोज़े की हालत में शर्मगाह (योनी) के अन्दर कोई चीज़ दाख़िल करने से रोज़ा फ़ासिद हो जाएगा?

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क्या रोज़े की निय्यत ज़बान से करना ज़रूरी है?

सवाल – अगर किसी ने ज़बान से रोज़े की निय्यत नहीं की, तो क्या उस का रोज़ा दुरूस्त होगा? स्पष्ट रहे के उस को ज़हनी तौर पर मालूम है के वह रमज़ान का रोज़ा रख रहा है.

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फ़जर से पेहले जनाबत का ग़ुसल न करने की सूरत में रोज़े का हुकम

सवाल – अगर किसी ने रमज़ान के महीने में एक दिन फ़जर की नमाज़ से पेहले जनाबत का ग़ुसल नहीं किया, बलके उस ग़ुसल को मुअ की नमाज़ से पेहले ग़ुसल जनाबत का ग़ुसल किया, तो क्या उस का रोज़ा दुरूस्त होगा?

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ज़कात की रक़म से स्कूल के लिए कोई सामान ख़रीदना

सवाल:– अगर कोई आदमी ज़कात अदा करने की निय्यत से ज़कात की रक़म से स्कूल के लिए कोई सामान खरीद ले, तो क्या इस तरह करने से उसकी ज़कात अदा होगी?

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शाबान की पंदरहवीं शब की फ़ज़ीलत

सवालः- मैंने एक अरब शैख़ से सुना कि शब-ए-बारात की फ़ज़ीलत के सिलसिले में जितनी भी हदीस वारिद हुई है वह सब ज़ईफ़ है, और उन में से कोई हदीस सहीह नहीं है. लिहाज़ा हमें इस शब (रात) और उस के अगले दिन को अहमियत देने की ज़रूरत नहीं। क्या …

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जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल (१३)

मय्यित को ग़ुसल देने के दौरान ज़िकर करना सवालः- मय्यित को ग़ुसल देने के दौरान दुरूद शरीफ़ पढ़ना अथवा कोई और ज़िकर करना कैसा है? जवाबः- मय्यित को ग़ुसल देने के दौरान बुलंद आवाज़ से दुरूद शरीफ़ पढ़ना अथवा कोई और ज़िकर करना सुन्नत से षाबित नहीं है. अलबत्ता ग़ुसल …

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