वुज़ु गुसल देनेवाला मय्यित को इस्तिन्जा कराने के बाद वुज़ु कराए. मय्यित को वुज़ु कराने का तरीक़ा वही है जो जीवित शख़्स के लिए है.(जो सुन्नतें जीवित शख़्स के लिए हैं, मय्यित को वुज़ु कराने में भी उन का ख़्याल रख्खा जाएगा) मात्र इतना फ़र्क़ है के मय्यित को कुल्ली …
اور پڑھوमय्यित को नेहलाने का तरीक़ा-भाग-१
जब मय्यित के गुसलऔर कफ़न दफ़न का प्रबंध हो जाए, तो मय्यित को स्ट्रेचर या तख़्त पर लिटा देंऔर गुसल के लिए ले जाऐं. अगर मुमकिन हो तो तख़्त यास्ट्रेचर को तीन, पांच या सात दफ़ा किसी ख़ुश्बुदारचीज़ की धुनी दे दें, ताकि अगर मय्यित के बदन से किसी प्रकार की बदबू ख़ारिज हो...
اور پڑھوमौत के बाद तुरंत क्या करना चाहिए ?
जब किसी की रूह निकल जाए, तो उस की आंखें बंद कर दो, सारे अंग ठीक कर दो, हाथों को उस के किनारे कर दो, उंगलियों और जोड़ों को ढीला कर दो, मुंह को इस तरीक़े से बांध दो के एक कपड़ा थोड़ी के नीचे से निकालो और उस के …
اور پڑھوमौत के वक़्त कलमए शहादत की तलक़ीन
जो लोग क़रीबुल मर्ग (मरने वाले) के पास बैठे हों, उन के लिए मुस्तहब है के आवाज़ के साथ कलमए शहादत पढ़हें, ताकि उन का कलमा सुन कर क़रीबुल मर्ग (मरनेवाला) भी कलमा पढ़ने लगे.(इस को शरीअत में कलमए शहादत की तलक़ीन कहा जाता है...
اور پڑھوज़िंदगी की अंतिम सांसे
जब इन्सान की सांस उखड़ जाए और सांस लेना कठिन हो जाए, बदन के अंग ढीले पड़ जाए के खड़ा न हो सके, नाक टेढ़ी हो जाए, कनपटयाँ बैठ जाऐं, तो समझना चाहिये के उस की मौत का वक़्त आ गया है. शरीअत में ऐसे शख़्स को “मुहतज़र” (क़रीबुल मर्ग) कहा गया है...
اور پڑھوज़िंदगी के अंतिम क्षण
كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ
"हर जानदार को मौत का मज़ा चखना हे." (सूरऎ आली इमरान)
मौत ऎक ऎसी अटल हक़िक़त (सच्चाई) है, जिस से किसी को छुटकारा नहीं है. मौमिन और काफ़िर दोनों ने इस की हक़्क़ानियत (सच्चाई) का स्वीकार किया हैं... اور پڑھوअदायगीए – हज के लिए अपनी बुन्यादी (मुल) जरूरी चीजें फरोखत (बेचना) करना
सवाल– अगर किसी के पास हज अदा करने के लिए पुरी रकम न हो, तो कया उस को अपनी हवाईजे असलिय्याह (ज़रूरत की चीज़ें मसलन घर, घरेलु सामान वग़ैरह) का बेचना ज़रूरी है; ताकि वह हज कर सके?
اور پڑھوशरई कारन के बगैर तवाफे विदाअ तर्क करना
सवाल – अगर कोई शख़्स बिना शर’ई उज़्र के तवाफ़ और तवाफ़-ए-विदा’ छोड़ दे तो क्या उस पर दम वाजिब होगा?
اور پڑھوहैज (माहवारी) या नीफास की वजह से तवाफे विदाअ छोड देना
सवाल – क्या औरत के लिए हैज़ या निफ़ास की वजह से तवाफ़-ए-विदा’ छोड़ना जायज़ है? (हैज़=औरत के मासिक धर्म का खून) (निफा़स= वो खून जो औरत को बच्चा जनने से चालीस रोज़ तक टपकता रहता है)
اور پڑھوहालते एहराम में चेहरा छुपाने की वजह से दम की अदायगी (भुगतान)
सवाल – अगर कोई औरत एहराम की हालत में अपना चेहरा ढांप ले, तो क्या उस पर दम वाजिब होगा?
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