सवाल: इस्तिबरा क्या है और क्या इस्लाम में उस की इजाज़त है? जवाब: इस्तिबरा यह है कि कज़ाए-हाजत के बाद इतनी देर इन्तिज़ार क्या जाए कि इस बात का यकीन हो जाए कि पेशाब के बाकी कतरे निकल चुके हैं। इस्लाम में इस की न सिर्फ इजाज़त है; बल्कि अहम …
اور پڑھوटॉयलेट-बाथरूम के अंदर अख़बारात वग़ैरह पढ़ना
सवाल – क्या टॉयलेट-बाथरूम के अंदर, अपनी ज़रूरत को पूरा करने के दौरान अख़बारात, रीसाले वग़ैरह पढ़ना या फ़ोन और इंटरनेट वग़ैरह का इस्तेमाल करना दुरुस्त है? जवाब – टॉयलेट-बाथरूम क़ज़ाऐ-हाजत के लिए है, इस में फ़ोन वग़ैरह का इस्तेमाल करना या अख़बारात वग़ैरह का पढना मुनासिब नहीं है। अल्लाह …
اور پڑھوमासिक धर्म के दौरान तवाफ़ ज़ियारत करना
सवाल: एक महिला हाइज़ा है (मासिक धर्म से गुजर रही है) और उसे तवाफ़-ए-ज़ियारत करना है, लेकिन वह वापसी की तारीख के बाद ही हैज़ (मासिक धर्म) से पाक होगी, जबकि उसके पास फ्लाइट बुक है, तो क्या उसके लिए गुंजाइश है कि हैज़ की हालत में तवाफ़-ए-ज़ियारत कर ले …
اور پڑھوतवाफ़-ए-ज़ियारत को क़ुर्बानी के दिनों के बाद तक अनावश्यक रूप से स्थगित करना
सवाल: अगर हाजी ने शरई उज़र के बिना कुर्बानी के दिनों के बाद तक तवाफ़-ए-ज़ियारत को टाल दिया, तो शरीयत में इस पर क्या हुक्म है? जवाब: ज़ियारत के तवाफ़ को बिना शरई उज़्र के कुर्बानी के दिनों के बाद तक टालना जायज़ नहीं है। अगर कोई देर करेगा तो …
اور پڑھوज़ियारत या उमरा का तवाफ़ बिना वज़ू किए करना
सवाल: अगर कोई शख्स बिना वुज़ू किये तवाफ़-ए-ज़ियारत या उमरे का तवाफ़ करे, तो शरीयत में उस का क्या हुक्म है? उत्तर: उस पर एक दम वाजिब होगा; अलबत्ता, अगर वह उस तवाफ़ को दोहरा ले, जो उसने वुज़ू के बगैर किया था, तो उस से दम गिर जाएगा। अल्लाह …
اور پڑھوतवाफ़ के दौरान वुज़ू तोड़ना
सवाल: अगर तवाफ़ करते समय किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को क्या करना चाहिये? जवाब: अगर तवाफ के दौरान किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को चाहिये कि वह फौरन फिर से वुज़ू करे और दोबारा तवाफ़ शुरू करे। अगर वह चाहे तो वह उसी …
اور پڑھوहज्ज की फ़रजियत के लिए कितने माल का मालिक होना ज़रूरी हैं?
सवाल – साहिबे-अहलो-अयाल (धर के मोभी) के पास कितना माल हो तो उस पर हज फ़र्ज़ होगा?
اور پڑھوमैय्यत की क़ब्र
(१) मैय्यत को घर में दफन न किया जाए, चाहे वह नाबालिग हो या बालिग, नेक हो या बुरा। घर के अंदर दफ़न होना नबियों की ख़ुसूसियत (विशेषता) है। (२) क़ब्र को चौकोर बनाना मकरूह है. क़ब्र को ऊँट के कोहान की तरह थोड़ा-सा ऊँचा करना मुस्तह़ब और पसंदीदा है। …
اور پڑھو(१७) जनाज़े से मुतफ़र्रिक़ मसाईल
कबर पर फुल चढ़ाने का हुकम सवाल: शरीयत में फुल चढ़ाना कैसा है? जवाब: कबर पर फुल चढ़ाना एक ऐसा अमल है, जिस का शरीअत में कोई सुबूत नहीं है; इसलिए उस से किनारा करना (बचना) ज़रुरी है। मय्यत के जिस्म से अलग हो जाने वाले आ’ज़ा (शरीर के अंग …
اور پڑھو(१६) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल
क़बर पर पौदे का ऊगना सवालः- अगर किसी क़बर पर पौदा उग जाऐ, तो क्या हमें उस का काटना ज़रूरी है? जवाबः- अगर क़बर पर पौदा ख़ुद बख़ुद उग जाऐ, तो उस को छोड़ दे. उस को काटने की ज़रूरत नहीं है. [१] क़बर पर पौदा लगाने अथवा टेहनी रखने …
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