फ़तावा

मुसलमान औरत(स्त्री) की ग़ैर मौजूदगी में मुसलमान औरत को ग़ुसल देने के अहकाम(आदेश)

अगर किसी की बीवी(पत्नी) का इन्तेक़ाल(मृत्यु) हो जाए और उस को ग़ुसल देने वाली कोई मुस्लिम औरत(स्त्री) मौजूद न हो, फिर भी शोहर(पति) के लिए जाईज़ नहीं है के उस को ग़ुसल दे या उस के बदन को नंगे हाथ मस करे...

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मुतफ़र्रिक़ मसाईल

अगर ग़ुसल देने वाला मुसलमान आदमी मौजूद न हो, तो मुरदा आदमी को कैसे ग़ुसल दिया जाए? अगर किसी आदमी का इन्तिक़ाल(मृत्यु) हो जाए और उस को ग़ुसल देने वाला कोई मुसलमान आदमी मौजूद न हो...

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मय्यित का चेहरा देखना और फ़ोटो खींचना

(१) सिर्फ महरम औरत के लिए जाईज़ है के मय्यित(मर्द) का चेहरा देखे. (२) इसी तरह सिर्फ महरम मर्द के लिए जाईज़ है के उस मय्यिता(औरत) का चेहरा देखे...

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मर्द और औरत के कफ़न से मुतअल्लिक़ कुछ अहम बातेः

(१) इज़ार और लिफ़ाफ़ा लपेटने के वक़्त मुस्तहब यह है के दायें हिस्से को बायें हिस्से के ऊपर लपेटें.[१७] (२) कफ़न पहनाने के बाद कफ़न को मय्यित के सर और पैर की तरफ़ कपड़े के एक टुकड़े से बांध दिया जाए, ताकि कफ़न न खुले...

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मज़ी का निकलना

सवाल – में जब भी कोई ख़ूबसूरत लड़की की तस्वीर दैखता हुं तो अकसर में नोट करता हुं मज़ी निकल जाती हैं. एसे में मुझे क्या करना चाहिए ग़ुसल या कपड़े बदलना चाहिए ?

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ख़ुले सर के साथ बैतुलख़ला में दाख़िल होना

सवाल – जब हम बैतुलख़ला में या ग़ुसलख़ाने में जाते हैं तो सर पर दुपट्टा लेना ज़ररी है? और मर्द नंगे सर बैतुलख़ला में जा सकते हैं? और अगर ज़रूरी है तो क्युं ?

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