फ़तावा

नए साल के मोक़े पर मुबारक बाद देना

सवाल – अगर चांद देखा जाये तो कल से नया इस्लामी साल मुहर्रम का महीना शूरू होगा. क्या हम उस मोक़े पर (यानी नये इस्लामी साल के शुरू में) एक-दूसरे को मुबारक-बाद दे सकते हैं या यह अमल शरीअत के ख़िलाफ़ है?

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मुहर्रम के महीने में रोज़ा रखने का षवाब

सवाल – क्या इस हदीस को बयान करना और उस पर अमल करना दुरूस्त है कि मुहर्रम के महीने में हर दिन नफ़ल रोज़े रखने का सवाब तीस दिनके नफ़ल रोज़ा रखने के सवाब के बराबर है?

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छुटी हुई क़ुर्बानी की क़ज़ा

सवाल – एक आदमी पर क़ुर्बानी वाजिब थी, मगर उस ने क़ुर्बानी नहीं की,  यहां तक के क़ुर्बानी के अय्याम गुज़र गए, तो वह क़ुर्बानी की क़ज़ा कैसे करे?

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क़ुर्बानी के लिए ख़रीदा गया जानवर का ज़बह करना

सवाल – एक आदमी ने (जिस पर क़ुर्बानी वाजिब थी) क़ुर्बानी का जानवर ख़रीदा, मगर उस को ज़बह नहीं कर सका, यहां तक के क़ुर्बानी के अय्याम गुज़र गए, तो वह क़ुर्बानी की क़ज़ा कैसे करे?

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क़ुर्बानी के जानवर में सातवें हिस्से से कम हिस्सा लेना

सवाल – अगर क़ुर्बानी के जानवर के शुरका में से किसी शरीक का हिस्सा सातवें हिस्से से कम हो, तो क्या तमाम शुरका की क़ुर्बानी दुरूस्त है?

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