हज़रत जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है के नबी (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) “क़ज़ाए हाजत के लिए एसी जगह तशरीफ़ ले जाते के कोई न देख सके.”...
اور پڑھوतीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में का…
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-मसऊद रज़ियल्लाहु ‘अन्हु पर रसूले-करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम का एतेमाद (भरोसा)
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لو كنت مؤمرا أحدا (على جيش) من غير مشورة (الصحابة، عند صعوبة جمعهم…
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकू़क़
हम अपनी ज़िंदगी में हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के एहसानात का जायज़ा लें, तो हमें माल…
बदनसीब इन्सान
جابر بن عبد الله رضي الله عنهما يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من ذكرت عنده فلم يصل علي فقد…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १
मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़…
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मौत के वक़्त कलमए शहादत की तलक़ीन
जो लोग क़रीबुल मर्ग (मरने वाले) के पास बैठे हों, उन के लिए मुस्तहब है के आवाज़ के साथ कलमए शहादत पढ़हें, ताकि उन का कलमा सुन कर क़रीबुल मर्ग (मरनेवाला) भी कलमा पढ़ने लगे.(इस को शरीअत में कलमए शहादत की तलक़ीन कहा जाता है...
اور پڑھوज़िंदगी की अंतिम सांसे
जब इन्सान की सांस उखड़ जाए और सांस लेना कठिन हो जाए, बदन के अंग ढीले पड़ जाए के खड़ा न हो सके, नाक टेढ़ी हो जाए, कनपटयाँ बैठ जाऐं, तो समझना चाहिये के उस की मौत का वक़्त आ गया है. शरीअत में ऐसे शख़्स को “मुहतज़र” (क़रीबुल मर्ग) कहा गया है...
اور پڑھوमुहर्रम और आशूरा
यह अल्लाह तआला का निज़ाम(प्रणाली) है के उनहोंने कुछ चीज़ों को कुछ चीज़ों पर विशेष फ़ज़ीलत और ऎहमीयत (महत्वता) दी है. चुनांचे ईन्सानों में अम्बीयाए किराम अलयहिमुस्सलातु वस्सलाम को दीगर लोगों पर ख़ास फ़ज़ीलत और फ़वक़ियत (प्राथमिकता) दी गई है. मक्का मदीना और मस्जिदे अक़सा को...
اور پڑھوज़िंदगी के अंतिम क्षण
كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ
"हर जानदार को मौत का मज़ा चखना हे." (सूरऎ आली इमरान)
मौत ऎक ऎसी अटल हक़िक़त (सच्चाई) है, जिस से किसी को छुटकारा नहीं है. मौमिन और काफ़िर दोनों ने इस की हक़्क़ानियत (सच्चाई) का स्वीकार किया हैं... اور پڑھو
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