यह अल्लाह तआला का निज़ाम(प्रणाली) है के उनहोंने कुछ चीज़ों को कुछ चीज़ों पर विशेष फ़ज़ीलत और ऎहमीयत (महत्वता) दी है. चुनांचे ईन्सानों में अम्बीयाए किराम अलयहिमुस्सलातु वस्सलाम को दीगर लोगों पर ख़ास फ़ज़ीलत और फ़वक़ियत (प्राथमिकता) दी गई है. मक्का मदीना और मस्जिदे अक़सा को...
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8 hours ago
सूरह-नास की तफ़सीर
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ﴿١﴾ مَلِكِ النَّاسِ ﴿٢﴾ إِلَٰهِ النَّاسِ ﴿٣﴾ مِن شَرِّ الْوَسْوَ…
4 days ago
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम का सहाबा-ए-किराम को हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु से क़ुरआन मजीद सीखने का हुक्म
خاطب رسول الله صلى الله عليه وسلم الصحابة رضي الله عنهم فقال: خذوا القرآن من أربعة من عبد الله بن مس…
7 days ago
सबसे अफ़ज़ल दुरूद
अ़ल्लामा सख़ावी रह़िमहुल्लाह फ़रमाते हैं कि सबसे अफ़ज़ल दुरूद दुरूदे-इब्राहीम है; क्योंकि रसूलुल्लाह…
1 week ago
मस्जिद में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय दुरूद पढ़ना
عن أبي حميد أو أبي أسيد الأنصاري رضي الله عنه قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا دخل أحدكم الم…
1 week ago
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम की ज़बाने-मुबारक से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की क़िराअत की तारीफ़
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من سره أن يقرأ القرآن رطبا كما أنزل فليقرأه على قراءة ابن أم عبد (…
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ज़िंदगी के अंतिम क्षण
كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ
"हर जानदार को मौत का मज़ा चखना हे." (सूरऎ आली इमरान)
मौत ऎक ऎसी अटल हक़िक़त (सच्चाई) है, जिस से किसी को छुटकारा नहीं है. मौमिन और काफ़िर दोनों ने इस की हक़्क़ानियत (सच्चाई) का स्वीकार किया हैं... اور پڑھوबयतुलख़ला की सुन्नतें और आदाब
(१) क़ज़ाए हाजत एसी जगह करना, जहां लोगों की नीगाहें न पडती हों, यअनी लोगों की नीगाहों से छुप कर क़ज़ाए हाजत करना.[1] عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما قال إن النبي صلى الله عليه وسلم كان إذا أراد البراز انطلق حتى لا يراه أحد (سنن أبي داود، …
اور پڑھوकुरबानी ओर सिलारहमी
عن ابن عباس رضي الله عنهما قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم في يوم أضحى ما عمل آدمي في هذا اليوم أفضل من دم يهراق إلا أن يكون رحما توصل رواه الطبراني في الكبير...
اور پڑھوअदायगीए – हज के लिए अपनी बुन्यादी (मुल) जरूरी चीजें फरोखत (बेचना) करना
सवाल– अगर किसी के पास हज अदा करने के लिए पुरी रकम न हो, तो कया उस को अपनी हवाईजे असलिय्याह (ज़रूरत की चीज़ें मसलन घर, घरेलु सामान वग़ैरह) का बेचना ज़रूरी है; ताकि वह हज कर सके?
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