क़सम है ज़माने की (१) बेशक इन्सान बड़े घाटे में है (२) सिवाए उन लोगों के जो और इमान लाए और अच्छे काम किए और एक दूसरे को हक़ बात की नसीहत करते रहे और एक दूसरे को सबर की नसीहत करते रहे (३)...
اور پڑھوMonthly Archives: December 2021
मामूलात की पाबंदी
में ने अपने वालिद साहब और हज़रत मदनी दोनों को अख़ीर शब में तन्हाई में रोते और गिड़गिड़ाते हुए देखा यह दोनों बिलकुल एसा रोते थे जैसा मकतब में बच्चा पिट रहा हो...
اور پڑھوनिकाह की सुन्नतें और आदाब – १२
अगर दुल्हा और दुल्हन (तथा दोनों के वकील) अलग अलग जगहों पर हों और उन के लिए एक ही जगह पर जमा होना अशक्य हो जहां निकाह की मजलिस आयोजित होगी, तो दुल्हन को चाहिए के वह किसी को अपना वकील बना दे और उस को अपना निकाह कराने की इजाज़त दे दे. जब वकील उस की तरफ़ से निकाह क़बूल कर ले, तो निकाह सहीह हो जाएगा...
اور پڑھو(७) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल
बाज़ जगहों पर हम देखते हैं के जब मय्यित को ग़ुसल दिया जाता है, तो उस का सतर खुल जाता है क्या यह दुरूस्त है?...
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (अठारहवां प्रकरण)
सहाबए किराम (रज़ि.) दीनी और दुन्यवी दोनों एतेबार से बेहद कामयाब थे और उन की कामयाबी तथा कामरानी का राज़ यह था के उन के दिलों में दुन्यवी मालो मताअ की मोहब्बत नहीं थी और वह हर समय तमाम ऊमूर में अल्लाह तआला की इताअत तथा फ़रमां बरदारी करते थे...
اور پڑھوनमाज़ की सुन्नतें और आदाब – ७
(१) दूसरी रकात के दूसरे सजदे के बाद क़ाअदे में बैठें. कअदा में इस तरह बैठ जाऐं, जिस तरह “जलसे” में बैठे....
اور پڑھوनमाज़ की सुन्नतें और आदाब – ६
पेहली रकअत के दूसरे सजदे के बाद तकबीर केह कर दूसरी रकअत के लिये खड़े हो जायें...
اور پڑھوख़ुशहाली सुन्नत पर अमल करने में है
पस जिन लोगों को रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के इत्तिबाअ में सादा मुआशरत मरग़ूब हो जाए और उन को इसी में लज़्ज़त और चैन मिलने लगे, उन पर अल्लाह तआला का बड़ा इनाम है के उन का चैन एसी चीज़ों से वाबस्ता फ़रमा दिया जो बेहद ससती है और जिन का हुसूल हर ग़रीबो फ़क़ीर के लिए बहोत आसान है...
اور پڑھوआर्थिक मामलों में सावधानी बरतना
“मालियात में तक़वा बहोत कम देखा जाता है. अफ़आल और आमाल तो आज कल बहोत हैं. तहज्जुद चाश्त इशराक विर्द वजीफ़े तो बहुत मगर यह बात बहुत कम है के माल से मोह तथा मोहब्बत न हो, तथा हो मगर फिर भी सावधान रहें, तो यह उस से बढ़ कर है.”...
اور پڑھو(६) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसअला
मय्यित की पेशानी और सजदे की जगहों (हाथ, पैर, नाक और घुटनों) पर काफ़ूर मलना अफ़ज़ल है. अलबत्ता काफ़ूर का पेस्ट बनाना और उस को मय्यित की पेशानी और सजदे की जगहों पर लगाना दुरूस्त नहीं है, क्युंकि यह सुन्नत के ख़िलाफ़ है और उस से चेहरा और दीगर अंग बदनुमा मालूम होते हैं...
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