Monthly Archives: October 2020

क्या जनाज़े की नमाज़ में जामअत शर्त है?

जनाज़े की नमाज़ की सिह्हत के लिए जमाअत शर्त नहीं है. चुनांचे अगर एक शख़्स भी मय्यित की जनाज़े की नमाज़ अदा करले, तो जनाज़े की नमाज़ दुरूस्त होगी, चाहे वह(जनाज़े की नमाज़ पढ़ने वाला) मुज़क्कर(मर्द) यो या मुअन्नत(स्त्री), बालिग़ हो या नाबालिग़. हर सूरत में जनाज़ की नमाज़ अदा हो जाएगी...

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अपने आमाल(कार्यों) से संतुष्ट नहीं होना

मेरे दोस्तो ! बहोत एहतियात रखो अपनी किसी हालत को अच्छा समझकर  उस पर इतरावो मत, हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद (रज़ि.) का फ़रमान है के ज़िन्दा आदमी ख़तरे से बाहर नहीं...

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सुरए अलम नशरह़ की तफ़सीर

क्या हम ने आप का सीना (ईल्म तथा हिल्म से) कुशादा नहीं कर दिया (१) और हम ने आप पर से आप का वह बोझ उतार दिया (२) जिस ने आप की क़मर तोड़ रखी थी (३) और हम ने आप के लिए आप का आवाज़ा(शोहरत) बुलंद किया (४)...

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तक़दीर से संबंधित अक़ाईद

(१) तक़दीर का मतलब है तमाम चीज़ों के बारे में अल्लाह तआला का जामेअ और मुहीत इल्म (व्यापक ज्ञान) यअनी अल्लाह तआला को तमाम चीज़ों का इल्म पेहले ही से है, चाहे वह छोटी तथा बड़ी हो, चाहे वह अच्छी तथा बुरी हो, चाहे वह भूत काल से तथा वर्तमान काल से या आईन्दा होने वाले ज़माने से संबंधित हो...

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मस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-१)

हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) फ़रमाया करते थे के “मस्ज़िद में दाख़िल होने के समय दायां पैर पेहले दाखिल करना और निकलते समय बायां पैर पेहले निकालना सुन्नत में से है.”...

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अज़ान और इक़ामत की सुन्नतें और आदाब-(भाग-२१)

अज़ान के जवाब की तरह इक़ामत का भी जवाब दें और जब قد قامت الصلاة (क़द क़ामतीस सलाह) कहा जाए, तो उस के जवाब में कहे...

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किसी दुर्घटना तथा प्राकृतिक आपदा की वजह से मौत

कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना तथा प्राकृतिक आपदा(आसमानी आफ़त) की वजह से मर जाए और उस के शरीर का अक्सर हिस्सा सहीह सालिम हो, तो उस को सामान्य तरीक़े के मुताबिक़ ग़ुसल और कफ़न दिया जाएगा और उस की जनाज़े की नमाज़ अदा की जाएगी...

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ज़िक्र से संपूर्ण फ़ाइदा प्राप्त करने की शर्त

ज़िक्र बड़ी बरकत की चीज़ है मगर उस की बरकत वहीं तक है के मुनकिरात से बचा रहे, अगर एक व्यक्ति फ़र्ज़ नमाज़ न पढ़े और नफ़लें पढ़े...

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