(३) वलीमा भी सादगी के साथ किया जाए. नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) का मुबारक फ़रमान है के “सब से बाबरकत वाला निकाह वह है, जिस में कम ख़र्च हो (यअनी निकाह और वलीमा सादा किया जाए और इसराफ़ और फ़ुज़ूल ख़र्ची से बचा जाए).”...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-७)
हज़रत अबु सईद ख़ुदरी (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमायाः “जिस ने मस्जिद से गंदगी साफ़ की, अल्लाह तआला उस के लिए जन्नत में घर बनाऐंगे.”....
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-६)
(२) मस्जिद में किसी आदमी को उस की जगह से उठान ताकि उस की जगह दूसरा आदमी बेठे, जाईज़ नहीं है...
اور پڑھوनिकाह की सुन्नतें और आदाब – ४
निकाह की कामयाबी के लिए और मियां बिवी के दरमियान स्नेह व मुहब्बत बाक़ी रेहने के लिए ज़रूरी है के दोनों एक दूसरे के समान और बराबर हो. जब मियां बिवी में जोड़ हो, तो बाहमी स्नेह और एकता होगी और हर एक ख़ुशी और मुहब्बत के साथ अपनी वैवाहिक ज़िम्मेदारीयों को पूरा करेगा...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-५)
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जिस व्यक्ति ने जुम्आ के दिन लोगों की गरदनें फांदी, उस ने (अपने लिए) जहन्नम में जाने का पुल बना लिया.”...
اور پڑھوनिकाह की सुन्नतें और आदाब – ३
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ि.) फ़रमाते हैं के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के दुनिया मालो मताअ और लज़्ज़त के योग्य चीज़ों से भरी हुई है और इन तमाम चीज़ों में सब से बेहतरीन दौलत “नेक बीवी” है...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-४)
(३) मस्जिद में किसी से लड़ाई और झगड़ा न करें, इसलिए के यह मस्जिद की बेहुरमती है...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-३)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर(रज़ि.) फ़रमाते हैं के “रसूलुल्लाह (सल्लललाहु अलयहि वसल्लम) ने मस्जिद में बैतबाज़ी(अंत्याक्षरी), खरीदो फ़रोख़्त(ख़रीदना तथा बैचना) और मस्जिद में जुम्आ के दिन नमाज़ से पेहले हलक़ा लगाने से मना किया है(चुंके हलक़े की हालत पर बैठना ख़ुत्बे की तरफ़ ध्यान केंन्द्रीत करने से मानेअ है).”...
اور پڑھوनिकाह की सुन्नतें और आदाब – २
निकाह का मुख्य उद्देश्य यह हे के मियां-बीवी पाकीज़ा ज़िंदगी गुज़ारें और एक दूसरे की सहायता करें अल्लाह तआला के हुक़ूक़(अधिकार) और हुक़ूक़े ज़वजिय्यत(वैवाहिक अधिकार) पूरा करने में...
اور پڑھوमस्ज़िद की सुन्नतें और आदाब- (भाग-२)
हज़रत अबू क़तादा (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जब तुम में से कोई मस्जिद में दाख़िल हो, तो उसे चाहिए के बैठने से पेहले दो रकात नमाज़ अदा करे.”...
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