सुननो आदाब

बयतुलख़ला की सुन्नतें और आदाब-(भाग-३)

६) इज़ार (पतलून) और लुंगी वग़ैरह खङें हो कर न उतारना, बल्कि ज़मीन के क़रीब हो कर उतारना (जब बेठने लगे, तब खोलना) ताकि कम से कम सतर ज़ाहिर हो.[1]

عن ابن عمر رضي الله عنهما قال كان النبي صلى الله عليه وسلم إذا أراد الحاجة لا يرفع ثوبه حتى يدنو من الأرض (سنن أبي داود، الرقم: ١٤)...

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बयतुलख़ला की सुन्नतें और आदाब- (भाग-२)

३) बयतुलख़ला में दाख़िल होने से पेहले हर उस चीज़ (मसलन अंगूठी,चैन) को नीकाल देना, ज़िस पर अल्लाह तबारक व तआला या रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि व सल्लम) का नाम लिखा हुवा या क़ुरआने करिम की कोई आयत दर्ज हो...

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बयतुलख़ला की सुन्नतें और आदाब- (भाग-१)

हज़रत जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है के नबी (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) “क़ज़ाए हाजत के लिए एसी जगह तशरीफ़ ले जाते के कोई न देख सके.”...

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बयतुलख़ला की सुन्नतें और आदाब

(१) क़ज़ाए हाजत एसी जगह करना, जहां लोगों की नीगाहें न पडती हों, यअनी ‎लोगों की नीगाहों से छुप कर क़ज़ाए हाजत करना.‎[1] عن جابر بن عبد الله رضي الله عنهما قال إن النبي صلى الله عليه وسلم كان إذا أراد البراز انطلق حتى لا يراه أحد (سنن أبي داود، …

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