सुननो आदाब

ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २

(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन के साथ हमदर्दी और भलाई वाला सुलूक किया जाए। इस का तरीक़ा यह है कि मय्यित के घर वालों की मौजूदगी में मय्यित के लिए दुआ की जाए। …

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ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – १

मुसीबत-ज़दा लोगों के साथ ताज़ियत इस्लाम एक जामे और मुकम्मल तर्ज़े-ज़िंदगी है। उस में इन्सान की हर ज़रूरत का ख़याल रखा गया है; चुनांचे इस्लाम ने हमें सिर्फ़ यह नहीं सिखाया कि हम कैसे इन्सान के साथ उस की ज़िंदगी में भलाई वाला सुलूक और मुआमला करें; बल्कि हमें यह …

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मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ​​४

मरीज़ की इयादत के वक़्त की दुआएं पेहली दुआः لَا بَأْسَ طَهُوْرٌ إِنْ شَاءَ اللهُ “घबराने की कोई बात नहीं, (यह बीमारी) पाक-साफ करने वाली है, इन्शाअल्लाह।” (सहीह बुख़ारी) (अर्थात तुम्हें बिल्कुल भी चिंता करने या डरने की आवश्यकता नहीं है। तुम्हें शुद्ध किया जा रहा है। आध्यात्मिक रूप से …

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मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ​​३

(१) बीमार की इयादत करने से पहले वज़ू करना मुस्तहब है। हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स अच्छी तरह वुज़ू करे (यानी वुज़ू के तमाम सुन्नत और मुस्तहब तरीक़ों का पूरा ख़्याल रखे) और अज्र व सवाब की नीयत से …

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बीमार की मिज़ाजपुर्सी (عیادت) की सुन्नतें और आदाब – २

इयादते-मरीज़ के फज़ाइल सत्तर हज़ार फ़रिश्तों की दुआ का हुसूल हज़रत अली रद़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़र्माया: “जो शख़्स सुब्ह को किसी बिमार आदमी की इयादत करे, उस के लिए सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक अल्लाह तआला से रहमत की दुआ करेंगे और …

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ज़कात की सुन्नतें और आदाब – १

ज़कात इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान में से एक अहम रुकन है। ज़कात सन २ हिजरी में रमज़ान के रोज़े से पेहले फर्ज़ हूई थी। कुराने-करीम में बहुत सी आयत और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की बहुत सी हदीस में ज़कात अदा करने की फ़ज़ीलत और अज़ीम सवाब बयान किया …

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मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ​​१

मरीज से इयादत दीने-इस्लाम इस बात का हुक्म देता है कि इन्सान अल्लाह तआला के हुकूक और उसके बंदों के हुकूक को पूरा करे। बंदों के जो हुकूक इन्सान पर लाज़िम हैं, उनकी दो किस्म हैं: पहली किस्म = जो हर एक पर इन्फिरादी तौर पर लाज़िम हैं। उदाहरण के …

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दुआ की सुन्नतें और आदाब – ७

(१७) बेहतर यह है कि जामे’ दुआ करें। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फ़रमाती हैं कि हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम जामे’ दुआ पसंद फ़रमाते थे और गैर-जामे’ दुआ छोड़ देते थे। नीचे कुछ मसनून दुआ नकल की जा रहे हैं जो मुख़्तलिफ़ अह़ादीसे-मुबारका में वारिद हुई हैं और जामे’ हैं: …

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इद्दत की सुन्नतें और आदाब – ५

हके-हिज़ानत – बच्चों की परवरिश का हक अलाहिदगी या तलाक की हालत में, बच्चों की परवरिश का हक मां को हासिल होगा, जब तक वो शादी न कर ले। अगर वो किसी ऐसे शख़्स से शादी कर ले जो बच्चो की गैर-महरम हो, तो वो बच्चो की परवरिश का हक …

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इद्दत की सुन्नत और आदाब – ४

इद्दत में बैठी हुई औरत से निकाह दीने-इस्लाम में इद्दत में बैठी हुई औरत से इद्दत के दौरान निकाह करना हराम है। (१) अगर निकाह करने वाले ने उस औरत से निकाह कर लिया, जब कि उस को मालूम था कि अब तक उस औरत की इद्दत पूरी नहीं हुई …

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