तहारत

ग़ुस्ल में नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को धोना

सवाल: ग़ुस्ल के दौरान मैं अपनी नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को उंगली से धोना भूल गया। क्या मेरा ग़ुस्ल सही है, या मुझे दोबारा ग़ुस्ल करना पड़ेगा? क्या ग़ुस्ल में नाफ़ के अंदरूनी हिस्से को रगड़ना ज़रूरी है? जवाब: ग़ुस्ल के सही होने के लिए नाफ़ के अंदर उंगली डालना …

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वुज़ू में पैरों की उंगलियों का खिलाल करने का तरीक़ा

सवाल: पैरों की उंगलियों का खिलाल करने का सही तरीक़ा क्या है? जवाब: बाएं हाथ की छोटी उंगली को पैरों की उंगलियों के दरमियान दाखिल करें। दाएं पैर की छोटी उंगली से खिलाल शुरू करें और बाएं पैर की छोटी उंगली पर ख़त्म करें। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. …

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बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना

सवाल: क्या बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है? जवाब: बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है; मगर मस्जिद के आदाब में से है कि आदमी मस्जिद में बा-वुज़ू दाखिल हो और जब तक मस्जिद में रहे बा-वुज़ू रहे। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. وَمَن …

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फर्ज़ गुसल में कान की बाली के सूराखों के अंदरूनी हिस्से को धोना

सवाल: क्या गुसल करते वक़्त कान की बाली के सूराख़ों के अंदरूनी हिस्से को धोना फ़र्ज़ है? जवाब: हां, औरत के लिए फ़र्ज़ है कि जब वो फ़र्ज़ गुसल करे, तो बाली के सूराख़ों के अंदरूनी हिस्से को धोये। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. (الفصل الأول في فرائضه) وهي …

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इस्तिबरा क्या है?

सवाल: इस्तिबरा क्या है और क्या इस्लाम में उस की इजाज़त है? जवाब: इस्तिबरा यह है कि कज़ाए-हाजत के बाद इतनी देर इन्तिज़ार क्या जाए कि इस बात का यकीन हो जाए कि पेशाब के बाकी कतरे निकल चुके हैं। इस्लाम में इस की न सिर्फ इजाज़त है; बल्कि अहम …

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टॉयलेट-बाथरूम के अंदर अख़बारात वग़ैरह पढ़ना

सवाल – क्या टॉयलेट-बाथरूम के अंदर, अपनी ज़रूरत को पूरा करने के दौरान अख़बारात, रीसाले वग़ैरह पढ़ना या फ़ोन और इंटरनेट वग़ैरह का इस्तेमाल करना दुरुस्त है? जवाब – टॉयलेट-बाथरूम क़ज़ाऐ-हाजत के लिए है, इस में फ़ोन वग़ैरह का इस्तेमाल करना या अख़बारात वग़ैरह का पढना मुनासिब नहीं है। अल्लाह …

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मज़ी का निकलना

सवाल – में जब भी कोई ख़ूबसूरत लड़की की तस्वीर दैखता हुं तो अकसर में नोट करता हुं मज़ी निकल जाती हैं. एसे में मुझे क्या करना चाहिए ग़ुसल या कपड़े बदलना चाहिए ?

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ख़ुले सर के साथ बैतुलख़ला में दाख़िल होना

सवाल – जब हम बैतुलख़ला में या ग़ुसलख़ाने में जाते हैं तो सर पर दुपट्टा लेना ज़ररी है? और मर्द नंगे सर बैतुलख़ला में जा सकते हैं? और अगर ज़रूरी है तो क्युं ?

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