सय्यिदिना रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) इस्लाम की शुरुआत के ज़माने में (जब दीन कमजोर था और दुनिया मज़बूत थी) बे तलब (जिन में शौक़ नही उन) लोगों के घर जा जा कर उन की सभा में बिला तलब (बिन बुलाये) पहुंच कर दावत देते थे, तलब के प्रतिक्षा नही करते थे. कुछ स्थानों पर...
और पढ़ो »मुसीबत की हालत के अहकाम
“अगर मुसीबत हमारे किसी भाई मुसलमान पर नाज़िल हो तो उस को अपने ऊपर नाज़िल समझा जावे उस के लिए वैसी ही तदबीर की जाए जैसा के अगर अपने ऊपर मुसीबत नाज़िल होती तो उस वक़्त ख़ुद करते.”...
और पढ़ो »महबूब आक़ा का फ़रमान
शेख़ुल हदीष हज़रत मौलाना मुहम्मद ज़करिय्या साहब (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “लोग अपने पूर्वजो से, ख़ानदान से और इसी तरह बहोत सी चीज़ों से अपनी शराफ़त तथा बड़ाई ज़ाहिर किया करते हैं, उम्मत के लिए गर्व का ज़रीआ कलामुल्लाह शरीफ़ है के उस के पढ़ने से उस के …
और पढ़ो »इस्लाम में फ़र्ज़ और नफ़ल का स्थान
“फ़राईज़ का स्थान नवाफ़िल से बहोत उच्चतर है बलकि समझना चाहिए के नवाफ़िल से मक़सूद ही फ़राईज़ की तकमील या उन की कोताहियों की तलाफ़ी होती है इसलिए के फ़राईज़ असल हैं...
और पढ़ो »हदिया देना सुन्नत है
p style="text-align: center;">“एक मौलवी साहब के सुवाल के जवाब में फ़रमाया के हदिया देना सुन्नत है जब सुन्नत है तो उस में बरकत कैसे न होगी न होने के क्या मअना۔۔۔
और पढ़ो »मुहब्बत आदाब का शिक्षक है
मौलवीओ ! तुम को मालूम है हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) बड़े ताजिर थे. उन्होंने अपना सब कुछ हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) और आप के ख़ादिमों पर ख़र्च कर दिया...
और पढ़ो »उसूल की पाबंदी
“दुनिया में कोई साधारण से साधारण काम भी सिद्धांत का पालन और उचित प्रकिया अपनाए बग़ैर नही होता. जहाज़, नाव, रेल, मोटर सब सिद्धांत से ही चलते हैं यहां तक की सालन रोटी तक भी सिद्धांत से ही पकती है.”
और पढ़ो »हिकमत की बात
“एक साहब ने बड़ी हिकमत की बात कही सोने के पानी से लिखने के क़ाबिल है वह यह के अगर बच्चा(बालक) किसी चीज़ को मांगे तो या तो उस की दरख़्वासत को शुरू ही में पूरी कर दे और यदी अगर पेहली बार में इनकार(मना) कर दिया तो फिर चाहे बच्चा(बालक) कितनी ही ज़िद करे कदापी उस की ज़िद पूरी न करे वरना आईन्दा उस को यही आदत पड़ जाएगी”...
और पढ़ो »वालिदैन के इन्तिक़ाल के बाद उनकी आझाकारिता का तरीक़ा
“जिस किसी ने अपने माता-पिता की ज़िंदगी में उन की सेवा तथा आझा का पालन न किया हो बाद में उन के इन्तिक़ाल के बाद उस की तलाफ़ी (प्रायश्र्वित) की शकल भी हदीष से षाबित है. वह यह के...
और पढ़ो »आख़िरत की तय्यारी
इन्सान का क़याम ज़मीन के ऊपर बहोत कम है और ज़मीन के नीचे उस को उस से बहोत ज़्यादह क़याम करना है. या युं समझो के दुन्या में तुम्हारा क़याम है बहोत अल्प समय के लिए, और उस के बाद जिन जिन स्थानों पर ठहरना है...
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