जब बंदे के ऊपर अल्लाह तआला के हर क़िसम के एहसानात हैं और फिर भी बंदा अल्लाह तआला के साथ अपना गुमान नेक न रखे, बलके यही ख़्याल करता रहे के अल्लाह तआला मुझ से नाराज़ हैं, तो यह कितना बुरा ख़्याल है...
और पढ़ो »जीवन के हर पहलू में सुन्नत का पालन करें
इत्तेबाए सुन्नत की जितना हो सके ख़ुद भी कोशिश कीजियो और दोस्तों को भी ताकीद कीजियो...
और पढ़ो »तबलीग का सही अर्थ
तबलीग़ यह है के अपनी सलाहिय्यत (योग्यता) और इस्तेअदाद (प्रतिभा) की हदतक लोगों को दीन की बात इस तरह पहोंचाई जाये जिस तरह पहोंचाने से लोगों के मानने की उम्मीद हो. अम्बिया (अलै.) यही तबलीग़ लाये हैं...
और पढ़ो »इस्लाम को ज़िन्दा करना
अगर मुसलमान अपनी इस्लाह कर लें और दीन उन में रचबस जाये (स्थापित हो जाये) तो दीन तो वह है ही, लेकिन दुन्यवी मसाईब का भी जो कुछ आजकल उस पर हुजूम है, इनशा अल्लाह चंद रोज़ में काया पलट हो जाये...
और पढ़ो »जीवन के हर पहलू में इत्तेबाये सुन्नत की कोशिश करे
मेरे चचा जान (यअनी हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब (रह.)) भी मुझको इत्तेबाए सुन्नत की नसीहत फ़रमाई थी और यह के अपने दोस्तो को भी उस की ताकीद ज़रूर करते रेहना...
और पढ़ो »इस्लाम में कलिमे की हक़ीक़त
हक़ीक़ी इस्लाम यह है के मुसलमान में “ला ईलाह इलल्लाह” की हक़ीक़त पाई जाए. और उस की हक़ीक़त यह है के उस का एतेक़ाद करने के बाद अल्लाह तआला की बंदगी का अज़मो इरादा दिल में पैदा हो...
और पढ़ो »ईमाम अबु हनीफ़ा (रह.) का अदब
सहाबी ने फ़रमाया के बड़े तो हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ही हैं लेकिन सन (उमर) मेरा ज़्यादा है...
और पढ़ो »पवित्र पूर्वजों के जीवन का अध्ययन सुन्नत की ओर ले जाता है
अपने पूर्वजों (अकाबिर) के हालात तथा वाक़िआत ख़ूब देखा करो, पढ़ा करो, सहाबा में भी मुझे देखने से हर रंग के मिले हैं, इसी तरह अपने पूर्वजों (अकाबिर) भी के उन में भी विभीन्न रंग के में ने पाए हैं...
और पढ़ो »दीनी इल्म हासिल करने का मक़सद
इल्म का सब से पेहला और अहम तक़ाज़ा यह है के आदमी अपने जीवन का एहतेसाब (हिसाब) करे, अपने फ़राईज़ और अपनी कोताहियों को समझे...
और पढ़ो »अलहे हक़ से दुश्मनी न होना ग़नीमत है
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “यह भी नफ़अ से ख़ाली नही के अगर इन्सान कुछ भी न करे तो कम से कम उस को अहले हक़ से दुश्मनी (दीली बुग़्ज़ और कीना) तो न हो यह दुश्मनी बहोत ही ख़तरनाक चीज़ है.” (मलफ़ूज़ाते हकीमुल …
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