प्यारो ! आदमी अपने आप से नहीं बढ़ता अल्लाह जल्ल शानुहु जैसे बढ़ावे वही बढ़ता है अपने आप को ख़ूब गिरावो, अपने समकालिन (मुआसिरीन) में से हर एक को अपने से बड़ा समझो...
اور پڑھوदीन की नींव को मज़बूत करना
हमारे नज़दीक उम्मत की अव्वल ज़रूरत यही है के उन के क़ुलूब (दिलों) में पेहले सहीह इमान की रोशनी पहोंच जाए...
اور پڑھوअल्लाह तआला का मामला बंदे की आशा के अनुसार
अल्लाह तआला अपने बंदे के साथ रहमत और फ़ज़ल ही का मामला फ़रमाते हैं वह किसी की मेहनत और तलब को बेकार अथवा फ़रामोश (भूलते) नही फ़रमाते...
اور پڑھوलोगों को दीन की तरफ़ राग़िब करना
मौतो हयात का एतेबार नहीं, याद रखो, एक वसिय्यत करता हुं नसीहत करता हुं वह यह के जहां तक हो सके हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इत्तेबा की कोशिश करो. दूसरी बात जो इस वक़्त केहनी है वह यह के...
اور پڑھوदीन की तलब तथा क़दर पैदा करना
हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “हमारे नज़दीक इस वक़्त उम्मत की असल बीमारी दीन की तलब तथा क़दर से उन के दिलों का ख़ाली होना है. अगर दीन की फ़िकर तथा तलब उन के अन्दर पैदा हो जाए और दीन की महत्तवता का शुऊर तथा …
اور پڑھوअस्लाफ़ की तरक़्क़ी और मौजूदा तरक़्क़ी
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “मौजूदा (दौर की) तरक़्क़ी का हासिल तो हिर्स (लालच) है और शरीअत ने हिर्स (लालच) की जड़ काट दी है. सहाबए किराम (रज़ि.) ने जो हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के नमूना थे कहीं एसे ख़्याल को अपने दिल में …
اور پڑھوहमारे बड़ों के अख़लाक़
“हम ने अपने बड़ों के मुतअल्लिक़ सुना के लोग उन के हालात देख कर और उन की सूरतों को देख कर ही मुसलमान हो जाया करते थे, एक हम हैं के हमारे अख़लाक़ देख कर लोग कहां जाएं.”...
اور پڑھوनमाज़ दीन का स्थंभ है
नमाज़ को हदीष में “इमादुद्दीन” (दीन का स्थंभ) फ़रमाया गया है. उस का यह मतलब है के नमाज़ पर बाक़ी दीन निलंबित है, और वह नमाज़ ही से मिलता है. नमाज़ में दीन का तफ़क्कुह (ज्ञान) भी मिलता है...
اور پڑھوशैतान के प्रलोभनों (वसवसों) को नज़रअंदाज़ करना
एक साहब जो वसाविस में मुब्तला थे सवाल के जवाब में फ़रमाया के शैतान के भगाने की तदबीर यह है के हिम्मत से उस का मुक़ाबला करो और मुक़ाबला यही है के उस की तरफ़ इलतिफ़ात(ध्यान) मत करो...
اور پڑھوमामूलात की पाबंदी
में ने अपने वालिद साहब और हज़रत मदनी दोनों को अख़ीर शब में तन्हाई में रोते और गिड़गिड़ाते हुए देखा यह दोनों बिलकुल एसा रोते थे जैसा मकतब में बच्चा पिट रहा हो...
اور پڑھو
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી