शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़कारिया रह़िमहुल्लाह ने एक बार इर्शाद फ़रमाया: अकाबिर के नक्शेकदम पर चलने की खूब कोशिश करो. इसमें मैंने बहुत बरकत देखी हैं.’ हज़रत गंगोही रह़िमहुल्लाह को मैंने खूब देखा। उसके बाद चार अकाबिर: हज़रत सहारनपुरी, हज़रत थानवी, हज़रत रायपुरी, हज़रत कांधलवी (हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब) …
اور پڑھوइल्मे-दीन और ज़िक्रे-अल्लाह की अच्छी तरह पाबंदी करना
एक दिन फजर की नमाज़ के बाद, जबकि इस तहरीक में अमली हिस्सा लेने वालों का निजामुद्दीन की मस्जिद में बड़ा मज्मा था और हज़रत मौलाना (इलियास) रह़िमहुल्लाह की तबीयत इस क़दर कमज़ोर थी कि बिस्तर पर लेटे-लेटे भी दो-चार लफ़्ज़ (शब्द) आवाज़ से नहीं फरमा सकते थे, तो ज़ोर …
اور پڑھوख़ानक़ाही लाइन में राहज़न चीजें
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मैं खैर ख्वाही से अर्ज़ करता हूँ, सब सुन लें। याद रखने की बात है कि इस तरीक़ में दो चीजें तालिब के लिए राहज़न और कातिल ज़हर हैं। एक: तावील अपनी गलती की और दूसरी: अपने मुअल्लिम (पीर,शेख,हज़रत) …
اور پڑھوअमल और मेहनत के बगैर कोई चारा नहीं है
शेख-उल-हदीस हजरत मौलाना मुहम्मद ज़करिया रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मेरा प्यारो! कुछ कर लो। مَنْ طَلَبَ الْعُلى سَهِرَ الَّیَالِيَ जो शख़्स कुछ बनना चाहे, तो उस को रातों में जागना पड़ता है। फरमाया: एक शख्स थे, जो कुछ रोज़ हजरत रायपुरी रहिमहुल्लाह की खिदमत में रहे, ज़िक्र-ओ-अज़कार में …
اور پڑھوमेहमान का इकराम
एक वक्त ऐसा हुआ कि शायद बारिश वगैरह की वजह से मौलाना के यहाँ गोश्त नहीं आ सका और उस दिन मेहमानों में मेरे एक मोह़तरम बुजुर्ग (जो हज़रत मौलाना के खास अज़ीज़ भी हैं) वो भी थे, गोश्त से रग्बत हज़रत मौलाना को मालूम थी, यह आजिज़ भी हाज़िर …
اور پڑھوदेखने की चिज़ दिल है
हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: लोग आ’माल को देखते हैं; मगर देखने की चिज़ है दिल, कि उसके दिल में अल्लाह और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मोहब्बत और ‘अज़मत (इज़्ज़त,बड़ाई) किस क़दर है। देहाती हैं,गंवार लोग हैं; मगर उनके दिल में अल्लाह …
اور پڑھوमौत के लिए हर एक को तैयारी करना है
शेखु-ल-ह़दीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिया रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मैं एक बात बहुत सोचता हूं कि मौत से हर एक को साबिका पड़ता है, फिर क्यूं मौत को याद नहीं रखते? आज असर के बाद हमारे एक पड़ोसी का इन्तिका़ल हो गया है, अल्लाह त’आला मगफिरत फ़रमाएं! उन्होंने …
اور پڑھوज़िकर करने और सही दीनी तालीम हासिल करने की अहमियत
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मैं शुरू में इस तरह जि़कर करने की तालीम देता हूं: हर नमाज़ के बाद “तस्बीहे़ फातिमा रदि अल्लाहु ‘अन्हा” और तीसरा कलिमा “سبحان الله والحمد لله ولا إلٰه إلا الله والله أكبر ولا حول ولا قوة إلا بالله” और …
اور پڑھوअदब का दारोमदार ‘उर्फ़ पर है
हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: अदब का दारोमदार सामान्य चलन पर है, ये देखा जाएगा कि ‘उफ़ में यह अदब के खिलाफ समझा जाता है या नहीं। इसी सिलसिले में याद आया कि एक मर्तबा एक खादिम को तंबीह फ़रमाई, जिन्होंने एक ही हाथ …
اور پڑھوदीनी इदारों की तौहीन करने से परहेज़ करें
शेखुल-हदीस हजरत मौलाना मुह़म्मद ज़करिया रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मेरे प्यारो! एक बहुत ही ज़रूरी और अहम बात कहना चाहता रहा; मगर अब तक न केह सका. तुम उलमा ए किराम हो, मुदर्रिस हो, बहुत से मदरसों के नाज़िम भी होंगे, ये मदारिस तुम्हारी बरकत से चल रहे …
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