मलफ़ूज़ात

मस्जिद के काम

हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहब (रह़िमहुल्लाह) ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: मस्जिदें, मस्जिदे-नबवी (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) की बेटियां हैं, इसलिए जो काम हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) की मस्जिद में होते थे, वो सब काम मस्जिद में होने चाहिए। नमाज़ के अलावा, हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) की मस्जिद में तालीम और …

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मुअक्कद-सुन्नत को मस्जिद में पढ़ना

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह़िमहुल्लाह) ने एक बार इर्शाद फ़रमाया: फर्ज़ के अलावा जो नमाज़ है, उन के मुताल्लिक (बारे में), सलफ़ (पेहले बुज़ुर्गो) में यही मामूल था कि घर पर पढ़ते थे, और फी-नफ्सिही इसमें फ़ज़ीलत है; मगर एक जमाअत ऐसी पैदा हो गई कि वो मुअक्कद-नमाज़ की …

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मद्रेसे के माल में एहतियात

शेखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक बात सुन लो! बड़े हज़रत रायपुरी रह़मतुल्लाहि ‘अलैह फ़रमाया करते थे कि मुझे जितनी मद्रेसे की सरपरस्ती (ट्रस्टी बनने) से डर लगता है, उतना किसी चीज़ से नहीं लगता। कोई आदमी किसी के यहां मुलाज़िम (नौकर) हो, कोताही …

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अल्लाह की नज़र से गिरने की एक वजह

एक दीनी मद्रसा के एक मशहूर उस्ताद का ज़िक्र करते हुए हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने फ़रमाया: मैंने उन से कहा कि आप लोगो के, अल्लाह की नज़र से गिरने और फिर उसी के नतीजे में दुनिया की नज़रों से भी गिर जाने की एक खास वजह यह …

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मुसलमान की सही सोच

हज़रत मौलाना इलियास साहब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: अपनी तही-दस्ती का यकीन (यानी अपने ना-अहल होने का यकीन) ही कामयाबी है। कोई भी अपने अमल से कामयाब न होगा। महज़ अल्लाह के फज़ल से कामयाब होगा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम फ़रमाते है: لن يدخل الجنة احد بعمله قالوا …

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अपने को मिटाना चाहिए

हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक बड़े फ़ाज़िल यहां आए और मुझ से कहा कि कुछ नसीहत कीजिए। मैंने कहा कि आप तो खुद आलिम हैं। मैं आप को क्या नसीहत करूं? उन्होंने फिर इसरार किया। मैंने कहा: मुझे तो बस एक ही सबक …

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तमाम तक्लीफ घटाने की तदबीर

एक साहब ने एक घरेलू मामले के संबंध में अर्ज़ किया कि इससे हजरत (हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह) को तक्लीफ़ हुई होगी। हज़रत वला (हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह) ने फ़र्माया: नहीं साहब! मुझे कुछ तकलीफ नहीं हुई.अल्लाह तआला का लाख लाख शुकर है कि उसने मुझ …

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बुज़्रगाने-दीन के नक्शेकदम पर चलने की खुब कोशिश करना

शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़कारिया रह़िमहुल्लाह ने एक बार इर्शाद फ़रमाया: अकाबिर के नक्शेकदम पर चलने की खूब कोशिश करो. इसमें मैंने बहुत बरकत देखी हैं.’ हज़रत गंगोही रह़िमहुल्लाह को मैंने खूब देखा। उसके बाद चार अकाबिर: हज़रत सहारनपुरी, हज़रत थानवी, हज़रत रायपुरी, हज़रत कांधलवी (हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब) …

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इल्मे-दीन और ज़िक्रे-अल्लाह की अच्छी तरह पाबंदी करना

एक दिन फजर की नमाज़ के बाद, जबकि इस तहरीक में अमली हिस्सा लेने वालों का निजामुद्दीन की मस्जिद में बड़ा मज्मा था और हज़रत मौलाना (इलियास) रह़िमहुल्लाह की तबीयत इस क़दर कमज़ोर थी कि बिस्तर पर लेटे-लेटे भी दो-चार लफ़्ज़ (शब्द) आवाज़ से नहीं फरमा सकते थे, तो ज़ोर …

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ख़ानक़ाही लाइन में राहज़न चीजें

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मैं खैर ख्वाही से अर्ज़ करता हूँ, सब सुन लें। याद रखने की बात है कि इस तरीक़ में दो चीजें तालिब के लिए राहज़न और कातिल ज़हर हैं। एक: तावील अपनी गलती की और दूसरी: अपने मुअल्लिम (पीर,शेख,हज़रत) …

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