मलफ़ूज़ात

ज़कात अदा करने से पूरे माल की हिफ़ाज़त

शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: अगर माल की ज़कात न निकाली जाए, तो फिर वह ज़कात वाला माल दूसरे माल को भी खा जाता है। ज़कात देने से माल में कमी वाक़े’ नहीं होती; लेकिन ज़कात न देने से माल रहता नहीं। आग …

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तीन तबक़ों में ख़ुसूसियत से जाना

हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाहि अ़लैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हमारी तबलीग़ में काम करने वालों को तीन तबक़ों में तीन ही मक़ासिद के लिए ख़ुसूसियत से जाना चाहिए: १. उ़लमा और सुलहा (अल्लाह के नेक बंदों) की ख़िदमत में दीन सीखने और दीन के अच्छे असरात लेने …

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बे-पर्दगी के ख़तरनाक नताइज (रिज़ल्ट)

हज़रत मौलाना अशरफ़ अ़ली थानवी रह़मतुल्लाहि अ़लैहि ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “जी हाँ! आज-कल बे-पर्दगी का ज़ोर है। बड़े फ़ित्ने का ज़माना है। यह एतिराज़ किया जाता है कि यह पर्दा औरतों को क़ैद में रखना है। मैं कहता हूँ कि यह क़ैद नहीं; बल्कि हिफ़ाज़त है, जो हर …

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तकब्बुर दूर होने की अलामत

शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिया रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक साहब ने ख़त लिखा था कि किब्र (तकब्बुर) के निकलने की अलामत क्या है? मैंने जवाब में लिखवाया कि अगर कोई तुम पर ए’तिराज़ करे, तनक़ीद करे, बुरा कहे, तो देखो! तुम्हारे क़ल्ब (दिल) पर उस का …

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दीन की ख़ातिर अल्लाह तआला का दिया हुआ तोहफा इस्तेमाल करना

हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ (जो कुछ हम ने इन को दिया है, इस में से ख़र्च करते हैं) को सिर्फ़ माल व दौलत से मख़्सूस करने की कोई वजह नहीं; बल्कि अल्लाह त’आला ने ज़ाहिर व बातिन की जो …

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उस्ताद की बे-अदबी इल्म से महरूमी का सबब

शेख़ुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिय्या रह़्मतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “मेरी बड़े एहतिमाम से तुम लोगों से दरख़्वास्त है कि इल्म हासिल करने में जितनी भी तवाज़ु हो सके (करना), ज़बानी नहीं, बल्कि दिल से इख़्तियार करना। अगर चाहो कि इल्म हासिल हो जाए, तो उस्ताद का अदब …

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सारा दारो-मदार हक़ त’आला के नज़दीक अच्छा होने पर है

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: आदमी ख़्वाह कितना ही आलिम, ज़ाहिद और मुत्तक़ी व परहेज़गार हो लेकिन इस को यह क्या ख़बर कि मैं ख़ुदा के नज़दीक कैसा हूं। इस एह़्तेमाल के होते हुए कोई क्या दावा कर सकता है? क्योंकि सारा दारो-मदार …

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नबियों के नाइब

हज़रत मौलाना मुह़म्मद इलियास साहब रहमतुल्लाही अलैह ने एक मर्तबा तालिबे-इल्मों से इरशाद फ़रमाया: “तुम अपनी क़द्र व क़ीमत तो समझो! दुनिया भर के ख़ज़ाने भी तुम्हारी क़ीमत नहीं। अल्लाह तआला के सिवा कोई भी तुम्हारी क़ीमत नहीं लगा सकता। तुम अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के नाइबीन (नाइब की जमा) हो, जो …

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मुसीबतों के वक़्त सब्र करना

हज़रत मौलाना मुहम्मद इल्यास साहिब रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: सब कारकुनों को समझा दो कि इस राह में बलाओं और तकलीफ़ों को ख़ुदा से मांगें तो हरगिज़ नहीं (बंदा को अल्लाह से हमेशा आफ़ियत ही मांगनी चाहिए; लेकिन अगर अल्लाह पाक इस राह में यह मुसीबतें भेज दे, …

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शोहरत के मुताल्लिक़ मज़ाक़

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़मतुल्लाहि ‘अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: उम्मत की ख़िदमत और उनके दीन की हिफ़ाज़त करना चाहिए। अपनी शोहरत में क्या रखा है? शोहरत के मुताल्लिक़ तो बस यह मज़ाक़ (रग़बत,चाहत) चाहिए कि न ज़िंदगी में किसी को ख़बर हो कि फ़ुलां शख़्स भी दुनिया …

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