लेख

(३) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल

सवालः क्या मय्यित के क़रीब रिश्तेदार औरतें तअज़ियत करे या मोहल्ले की दूसरी औरतें भी तअज़ियत कर सकती हैं? जवाबः तअज़ियत सुन्नत है और तअज़ियत की सुन्नत मय्यित के क़रीबी रिश्तेदारों के साथ मख़सूस नहीं है. बलके मय्यित के क़रीबी रिश्तेदार और वह लोग जो मय्यित के रिश्तेदार नहीं हैं सब तअज़ियत कर सकते हैं...

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मोहब्बत का बग़ीचा (सोलहवां प्रकरण)‎

अल्लाह तआला ने दुनिया को सब से बेहतरीन शकल में पैदा किया है और उस का निज़ाम इतना मुसतहकम(मज़बूत) बनाया है के दुनिया का हर चीज़ मुकम्मल व्यवस्थित अंदाज़ मां अल्लाह तआला की इच्छा के अनुसार चल रही है...

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(२) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल

अगर कोई मय्यित के घर जाए और वहां खाना पेश किया जा रहा हो, तो क्या वह खाना तनावुल करना जाईज़ है? क्या मय्यित के घर उस के घरवाले और मेहमानों के लिए खाना भेजना जाईज़ है?...

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मोहब्बत का बग़ीचा (पंदरहवां प्रकरण)‎

अल्लाह तआला हम सब को अपनी ज़िन्दगी दुरूस्त करने और ज़िन्दगी के तमाम ऊमूर में नबिये करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के तरीक़े पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाये और हम सब को अच्छे ख़ातमे की दौलत से नवाज़े. आमीन या रब्बल आलमीन...

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मोहब्बत का बग़ीचा (चौदहवां प्रकरण)‎

जब इन्सान शरीअत के मुताबिक़ जिवन गुज़ारता है, तो उस को हक़ीक़ी ख़ुशी और मसर्रत हासिल होती है, अगर चे उस के पास मालो दौलत ज़्यादा न हो और अगर वह शरीअत के मुताबिक़ ज़िन्दगी न गुज़ारे, तो उस को हक़ीक़ी ख़ुशी हरगिज़ हासिल नहीं होगी, अगर चे उस के पास बे पनाह मालो दौलत हो...

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मोहब्बत का बग़ीचा (तेरहवां प्रकरण)‎

بسم الله الرحمن الرحيم ख़ैरो बरकत की चाबी रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के ज़माने में एक दफ़ा क़बीलए बनु अशअर का एक प्रतिनिधिमंडल यमन से हिजरत कर के मदीना मुनव्वरा पहुंचा. मदीना मुनव्वरा पहुंचने के बाद उस प्रतिनिधिमंडल का तोशा ख़तम हो गया, तो उन्होंने एक आदमी को नबीए …

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मरज़ुल मौत (मौत की बीमारी)

अगर कोई शख़्स मरज़ुल मौत में हो, मगर किसी और सबब से मर जाये (मिषाल के तौर पर वह आख़री दरजे के केन्सर में मुब्तला हो, मगर वह गाड़ी के हादषे की वजह से मर जाये) तब भी इस बीमारी को “मरज़ुल मौत” कहा जायेगा...

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मुसलमान की गर्भवती ईसाई या यहूदी बिवी की तदफ़ीन कहां की जाये?

अगर गर्भवती महीला औरत मर जाये और उस के पेटे में बच्चा जिवीतत हो, तो बच्चे को आपरेशन के द्वार निकाला जायेगा और अगर बच्चा जिवीत न हो, तो उस को नहीं निकाला जायेगा...

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मोहब्बत का बग़ीचा (बारहवां प्रकरण)‎

हम दुआ गो हैं के अल्लाह तआला हमारी औरतों में सिफ़ते “हया” को ज़िन्दा फ़रमाऐं और उन्हें नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की सुन्नतों और अज़वाजे मुतह्हरात के तरीक़ों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमायें. आमीन...

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