ग़ुसल के शुरू में जब मय्यित को वुज़ू कराया जाए, तो कहां से शुरू करना चाहिए यअनी पेहले मय्यित के हाथों को गट्टों समैत धोया जाए या पेहे चेहरा धोया जाए?...
اور پڑھو(९) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल
अगर मय्यित के नाख़ुनों पर नाख़ुन पालिश लगी हो, तो क्या ग़ुसल देने वाले के लिए उस को निकालना ज़रूरी है?...
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (उन्नीसवां प्रकरण)
अल्लाह सुब्हानहु वतआला ने इन्सान को बेशुमार नेअमतों से नवाज़ा है. कुछ नेअमतें शारिरिक हैं और कुछ नेअमतें रूहानी हैं. कभी एक नेअमत एसी होती है के वह बेशुमार नेअमतों को शामिल होती है. मिषाल के तौर पर आंख एक नेअमत है, मगर...
اور پڑھو(८) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल
सवालः- मय्यित को ग़ुसल किस को देना चाहिए? कभी कभी मय्यित के ग़ुसल के वक़्त कुछ लोग मात्र देखने के लिए आ जाते हैं, जबके मय्यित के परिवार वाले इस को पसन्द नहीं करते हैं, तो क्या परिवार वाले उन लोगों को मनअ कर सकते हैं?...
اور پڑھو(७) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाईल
बाज़ जगहों पर हम देखते हैं के जब मय्यित को ग़ुसल दिया जाता है, तो उस का सतर खुल जाता है क्या यह दुरूस्त है?...
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (अठारहवां प्रकरण)
सहाबए किराम (रज़ि.) दीनी और दुन्यवी दोनों एतेबार से बेहद कामयाब थे और उन की कामयाबी तथा कामरानी का राज़ यह था के उन के दिलों में दुन्यवी मालो मताअ की मोहब्बत नहीं थी और वह हर समय तमाम ऊमूर में अल्लाह तआला की इताअत तथा फ़रमां बरदारी करते थे...
اور پڑھو(६) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसअला
मय्यित की पेशानी और सजदे की जगहों (हाथ, पैर, नाक और घुटनों) पर काफ़ूर मलना अफ़ज़ल है. अलबत्ता काफ़ूर का पेस्ट बनाना और उस को मय्यित की पेशानी और सजदे की जगहों पर लगाना दुरूस्त नहीं है, क्युंकि यह सुन्नत के ख़िलाफ़ है और उस से चेहरा और दीगर अंग बदनुमा मालूम होते हैं...
اور پڑھو(५) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसाइल
ग़ुसल देने के वक़्त मय्यित को जिस तरह से भी रखना आसान हो उसी तरह उस को रखो, उस के लिए कोई विशेष सिम्त (दिशा) नियुक्त नहीं है...
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (सतरहवां प्रकरण)
जो व्यक्ति अल्लाह तआला की विशेष रहमत का तालिब है उसे चाहिए के वह पांच वक़्त की नमाज़ें जमाअत के साथ पाबंदी के साथ मस्जिद में अदा करे, तमाम गुनाहों से बचना और मख़लुक के साथ शफ़क़त तथा हमदरदी के साथ पेश आए और उन के अधिकार अदा करे...
اور پڑھو(४) जनाज़े से संबंधित मुतफ़र्रिक़ मसअला
शहीद पर ग़ुसल वाजिब नहीं है, लिहाज़ा अगर किसी शख़्स को क़तल कर दिया गया हो, तो उस को उस के ख़ून के साथ दफ़न कर दिया जाएगा और उस को ग़ुसल देना वाजिब नहीं होगा, अगरचे...
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