अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर करने वालों की महान फ़ज़ीलत और बुलंद मर्तबा दुनिया में हमारा मुशाहदा है के कोई भी मज़हब तथा दीन सिर्फ़ उसी सूरत में बाक़ी रेह सकता है और फैल सकता है, जब उन के लोगों में से कोई जमाअत हो जो उस मज़हब …
और पढ़ो »क़यामत की अलामात (संकेत) – दूसरा प्रकरण
उम्मत के सामने क़यामत की अलामत को बयान करने का मक़सद हज़रत रसूले ख़ुदा (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत को क़यामत की बहोत सी छोटी और बड़ी अलामतों से आगाह किया है. उन में बहोत सी छोटी अलामतें गुज़िश्ता सदियों में ज़ाहिर हो चुकी हैं और बहोत सी छोटी …
और पढ़ो »मोहब्बत का बग़ीचा (चोबीसवां प्रकरण)
जिस तरीक़े से अंबिया (अलै.) और सहाबए किराम (रज़ि.) ने मख़लूक़ की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश की, अल्लाह तआला हमें मख़लूक़ की ख़ैर ख़्वाही की फ़िकर अता फ़रमाई और उन की ज़रूरतों को पूरा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाई. आमीन....
और पढ़ो »इत्तेबाए सुन्नत का प्रबंध – २
हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही (रह.) और उन की इत्तेबाए सुन्नत का प्रबंध हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही (रह.) महान दीन के आलिम, जलील मुहद्दिष, बहोत बड़े फ़क़ीह और अपने ज़माने के वलीए कामिल थे. उन का सिलसिलए नसब वंशावली मशहूर सहाबी हज़रत अबु अय्यूब अन्सारी (रज़ि.) तक पहोंचता था. …
और पढ़ो »मोहब्बत का बग़ीचा (तेईसवां प्रकरण)
بسم الله الرحمن الرحيم वालिदैन के महान अधिकार अल्लाह सुब्हानहु वतआला की अता करदा बड़ी नेअमतों में से वालिदैन की नेअमत है. वालिदैन की नेअमत इतनी अज़िमुश्शान नेअमत है के उस नेअमत का कोई बदल नही है और यह नेअमत एसी है के इन्सान को अपने जिवन में एक ही …
और पढ़ो »अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की ज़िम्मे दारी – प्रकरण-१
इन्शा अल्लाह आईन्दा क़िस्तों में हम दीन के इस अहम विभाग (यअनी अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर) को क़ाईम करने की महत्तवता को बयान करेंगे. और साथ साथ हम उस से संबंघित मसाईल को भी बयान करेंगे. इसी तरह हम सहाबए किराम (रज़ि.) और अस्लाफ़ के उन वाक़ियात को ज़िकर करेंगे. जिन से हमें मालूम होगा के उन्होंने कैसै अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की यह बड़ी ज़िम्मेदारी अपने जिवन में अन्जाम दी है...
और पढ़ो »क़यामत की अलामात (संकेत)- दूसरा प्रकरण
उलमाए किराम ने क़यामत की अलामतों को दो हिस्सों में तक़सीम किया हैः बड़ी अलामतें और छोटी अलामतें. छोटी अलामतों में सब से पेहली अलामत नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की इस दुनिया से रिहलत (जाना) है और बड़ी अलामतों में सब से पेहली अलामत इमाम महदी (अलै.) का ज़ुहूर (ज़ाहिर होना) है...
और पढ़ो »मोहब्बत का बग़ीचा (बाईसवां प्रकरण)
अहादीषे मुबारका से अच्छी तरह स्पष्ट हो गया के इस्लाम में पड़ोसियों के अधिकार के मुतअल्लिक़ बहोत ज़्यादा महत्तवता दी गई हैं, लिहाज़ा हमें चाहिए के उन के तमाम अधिकार को अदा करने की भरपूर कोशिश करें...
और पढ़ो »इत्तेबाए सुन्नत का एहतेमाम – १
हम दुआ गो हैं के अल्लाह सुब्हानहु वतआला हम सब को अपनी ज़िन्दगी में नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की सुन्नतों पर मज़बूती से अमल करने में हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ (रज़ि.) और तमाम सहाबए किराम (रज़ि.) के नक़्शे क़दम (पदचिन्हों) पर चलने की तौफ़ीक़ मरहमत फ़रमाऐं. आमीन...
और पढ़ो »मोहब्बत का बग़ीचा (एकिसवां प्रकरण)
ए बिशर ! तुम ने हमारा नाम ज़मीन से उठाया और उस में ख़ुश्बू लगाई, बेशक हम तुम्हारा नाम दुनिया और आख़िरत में रोशन करेंगे. इस अमल की वजह से अल्लाह तआला ने मुझे यह स्थान अता फरमाया है...
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