नेक,सालेह आलिम से मशवरा करने की अहमियत “हर फन में उसके माहिर लोगों से मशवरा तलब करना” एक उसूल और ज़ाब्ता है, जो आम तौर पर बयान किया जाता है और जिंदगी के तमाम मरहलों में उस पर अमल किया जाता है। मिसाल के लिए, सोचें कि एक शख़्स अपने …
اور پڑھوअम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर की ज़िम्मे दारी – प्रकरण-७
लोगों की इस्लाह के वक्त रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अंदाज हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रदि अल्लाहु ‘अन्हुमा का एक बूढ़े शख्स को वुज़ू का सही तरीका सिखाना एक बार मदीना मुनव्वरा में एक बूढ़ा शख्स आया। नमाज़ के वक्त जब वो वुज़ू करने लगा, तो हज़रत हसन …
اور پڑھوक़यामत की निशानियां – क़िस्त ५
दज्जाल के बारे में अहले सुन्नत वल-जमआत का ‘अकीदा दज्जाल की जाहिर होने और उसकी फितनो का जिक्र ‘अकाईद की किताबों में आया है। ‘उलमा ए ‘अकाईद इस बात पर सहमत हैं कि दज्जाल जाहिर होने पर ईमान रखना अहले सुन्नत वल-जमात की ‘अकीदों का हिस्सा है। वो हदीसें जिनमें …
اور پڑھوइत्तेबाए सुन्नत का एहतेमाम – ६
हजरत मुफ़्ती महमूद हसन गंगोही रहिमहुल्लाह हज़रत मुफ़्ती महमूद हसन गंगोही रहिमहुल्लाह हमारे बुजुर्गाने किराम और बड़े लोगों में से थे, जिनका ज़माना हमसे ज़्यादा दूर नहीं है। उनकी पैदाइश 1325 हिजरी में हुई और वह हज़रत शेखु-ल-ह़दीस मौलाना मुह़म्मद ज़कारिया कांधलवी रहिमहुल्लाह के अजल्ले-खुलफा में से थे। वो कई …
اور پڑھوमैय्यत की क़ब्र
(१) मैय्यत को घर में दफन न किया जाए, चाहे वह नाबालिग हो या बालिग, नेक हो या बुरा। घर के अंदर दफ़न होना नबियों की ख़ुसूसियत (विशेषता) है। (२) क़ब्र को चौकोर बनाना मकरूह है. क़ब्र को ऊँट के कोहान की तरह थोड़ा-सा ऊँचा करना मुस्तह़ब और पसंदीदा है। …
اور پڑھوलोगों को नसीहत करते वक्त उनको शर्मिंदा करने से बचना
जो शख्स ऐसे लोगों को सलाह देता है जो दीन से दूर हैं और उनके पास दीन की सही समझ नहीं है, तो उसके लिए ज़रूरी है कि वह उनके साथ नरमी से बात करे। नरमी से बात करने के साथ साथ उसको चाहिए कि वो किसी भी तरीके से …
اور پڑھو(१७) जनाज़े से मुतफ़र्रिक़ मसाईल
कबर पर फुल चढ़ाने का हुकम सवाल: शरीयत में फुल चढ़ाना कैसा है? जवाब: कबर पर फुल चढ़ाना एक ऐसा अमल है, जिस का शरीअत में कोई सुबूत नहीं है; इसलिए उस से किनारा करना (बचना) ज़रुरी है। मय्यत के जिस्म से अलग हो जाने वाले आ’ज़ा (शरीर के अंग …
اور پڑھوक़यामत की अलामात- चोथी कि़स्त
क़यामत की दस बड़ी निशानियां जिस तरह क़यामत की छोटी-छोटी निशानियाँ मुबारक हदीसों में बयान की गई हैं, इसी तरह क़यामत की बड़ी निशानियाँ भी मुबारक हदीसों में बयान की गई हैं। क़यामत की बड़ी निशानियों से मुराद वह अहम (महत्वपूर्ण) वाक़िआत हैं जो क़यामत से पहले इस दुनिया में …
اور پڑھوलोगों की इस्लाह के वक्त रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अंदाज
अम्र बिल मारूफ और नही ‘अनिल मुन्कर ( नेक कामों का हुकम देना और बुरे कामों से रोकना) दीन का एक अहम फ़रीज़ा (कर्तव्य) है; लेकिन इन्सान के लिए जरूरी है कि वह जिस की इस्लाह करना चाहता है उसके बारे में उसको इल्म हो, नीज़ उस को यह भी …
اور پڑھوइत्तिबा’-ए-सुन्नत का एहतिमाम- ५
हज़रत शेखुल-हिन्द मौलाना महमूदुल-हसन देवबंदी रहिमहुल्लाह हज़रत शेखुल-हिन्द मौलाना महमूदुल-हसन देवबंदी रहिमहुल्लाह हिन्दुस्तान के एक जलीलुल-क़द्र आलिमे दीन थे। उन की विलादत (पैदाइश) सन हिजरी १२६८ में (सन इस्वी १८५१) हुई। उन का सिलसिला-ए-नसब (खानदानी सिलसिला) हज़रत उस्मान रदि अल्लाहु अन्हु तक पहुंचता है और वो दारुल उलूम देवबंद के …
اور پڑھو
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી