दज्जाल की आमद (आने) से पहले उम्मत का गिरना हदीस शरीफ़ में आया है कि क़ियामत से पहले लोगों की ज़िंदगी का सब से पहला मक़सद और असल मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा माल जमा करना होगा। लोग माल को इस निगाह से देखेंगे कि माल ही तमाम राहतों और आसानी …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: ८२)
“खलीलुल्लाह” के लक़ब से नवाज़ा जाना तमाम नबियों में से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को “खलीलुल्लाह” (अल्लाह के खास दोस्त) के खिताब से नवाज़ा गया। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को यह शर्फ कैसे मिला, इसके बारे में अल्लामा इब्ने-कसीर रह़िमहुल्लाह ने यह वाक्या बयान किया है: हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह आदत-ए-शरीफा …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: 81)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बुलंद मकाम अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के तमाम बंदों में से नबियों (पैग़ंबरों) का इस्लाम सबसे ऊंचे और सबसे बेहतर दर्जे का था। अल्लाह तआला ने उन्हें इन्सानियत की रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए चुना था और उन्हें दुनिया में इस मकसद के लिए भेजा कि वे लोगों को …
اور پڑھوबाग-ए-मोहब्बत (किस्त-८०)
इस्लाम की करेंसी इस दुनिया की ज़िंदगी में इन्सान की एक बुनियादी फिक्र ‘माल’ हासिल करना है। इसकी वजह यह है कि इन्सान माल को इस दुनिया की करेंसी समझता है और वह यह भी जानता है कि वह इस माल के ज़रिए कितने फायदे हासिल कर सकता है। इन्सान …
اور پڑھوकयामत की निशानियां – सातवां एपीसोड
पहला हिस्सा: दज्जाल के तीन खास हथियार: दौलत, औरत और खेलकूद जब दज्जाल लोगो के सामने आयेगा तो लोगो को गुमराह करने के लिए तीन खास हथियार इस्तेमाल करेगा और वो तीन हथियार दौलत, औरत और खेलकूद हैं। अल्लाह तआला उसे बाज़ ऐसे काम अंजाम देने की ताकत अता करेगा …
اور پڑھوक़यामत की निशानियां
दज्जाल के फ़ित्नो से कैसे बचें? मुबारक हदीसों में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने अपनी उम्मत को हर ज़माने के फ़ित्नो और खास तौर पर दज्जाल के फ़ित्नो से हिफाज़त का तरीका सिखाया है; चुनांचे एक हदीस शरीफ में है कि हज़रत उक़्बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु ने एक मर्तबा …
اور پڑھوबाग़े मोहब्बते (चौंतीसवाँ एपिसोड)
एक अज़ीम वली – हज़रत फ़ुज़ैल बिन अयाज़ रह़िमहुल्लाह हज़रत फ़ुज़ैल बिन अयाज़ रह़िमहुल्लाह अपने ज़माने के एक बड़े मुहद्दिस और अज़ीम वली थे। अल्लाह तआला ने उन्हें हदीस के फ़न में इतना बुलंद मक़ाम अता फ़रमाया था कि बड़े बड़े मुहद्दिस जैसे हज़रत अब्दुल्ला बिन मुबारक रह़िमहुल्लाह, हज़रत सुफ़ियान …
اور پڑھوअम्र बिल-मारूफ और नही अनिल-मुन्कर की जिम्मेदारी – आठवां एपिसोड
रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की चार बुनियादी जिम्मेदारियाँ रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम इस दुनिया में लोगों के बीच दीन क़ाइम (स्थापित) करने के लिए भेजे गए और इस अहम और अज़ीम (महान) मकसद को पुरा करने के लिए आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को चार जिम्मेदारियाँ दी गईं। इन चार जिम्मेदारियों …
اور پڑھوक़यामत की निशानियां – क़िस्त ६
दज्जाल के दस जिस्मानी और इन्सानी लक्षण मुबारक हदीस में नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने उम्मत के सामने दज्जाल के जिस्मानी और इन्सानी औसाफ़ बयान फ़र्माए हैं। रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम का दज्जाल के जिस्मानी और इन्सानी औसाफ़ को बयान करना इस हकीक़त की तरफ इशारा करता है कि दज्जाल …
اور پڑھوइत्तेबाए सुन्नत का एहतेमाम – ७
शेखुल-इस्लाम हजरत मौलाना हुसैन अहमद मदनी रह़िमहुल्लाह शेखुल-इस्लाम हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी रह़िमहुल्लाह एक सैय्यद थे, यानी आप अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम के खानदान में से थे और जलीलुल-क़द्र आलिमे-दीन थे। आप १२९६ हिजरी (सन ईस्वी १८७९) में पैदा हुए और ८१ साल की उम्र में १३७७ …
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