अगर ग़ुसल देने वाला मुसलमान आदमी मौजूद न हो, तो मुरदा आदमी को कैसे ग़ुसल दिया जाए? अगर किसी आदमी का इन्तिक़ाल(मृत्यु) हो जाए और उस को ग़ुसल देने वाला कोई मुसलमान आदमी मौजूद न हो...
اور پڑھوमय्यित का चेहरा देखना और फ़ोटो खींचना
(१) सिर्फ महरम औरत के लिए जाईज़ है के मय्यित(मर्द) का चेहरा देखे. (२) इसी तरह सिर्फ महरम मर्द के लिए जाईज़ है के उस मय्यिता(औरत) का चेहरा देखे...
اور پڑھوबच्चों के कफ़न दफ़न के मसाईल
(१) बलाग़त के क़रीब लड़की और लड़के के कफ़न दफ़न बालिग़ मर्द और औरत की तरह की जाएगी...
اور پڑھوमर्द और औरत के कफ़न से मुतअल्लिक़ कुछ अहम बातेः
(१) इज़ार और लिफ़ाफ़ा लपेटने के वक़्त मुस्तहब यह है के दायें हिस्से को बायें हिस्से के ऊपर लपेटें.[१७] (२) कफ़न पहनाने के बाद कफ़न को मय्यित के सर और पैर की तरफ़ कपड़े के एक टुकड़े से बांध दिया जाए, ताकि कफ़न न खुले...
اور پڑھوमय्यित की तकफ़ीन(औरत)
मय्यित (औरत) का कफ़न बिछाने और पेहनाने का तरीक़ा (१) औरत के लिए कफ़न में पांच कपड़े मस्नून है...
اور پڑھوमय्यित की तकफ़ीन
मय्यित (मर्द) का कफ़न बिछाने और पेहनाने का तरीक़ा (१) मर्दकेकफ़नमेंतीनकपड़े मस्नूनहैः कमीज(कुर्ता), इज़ारऔरलिफ़ाफ़ा(चादर). (२) इज़ारसरसेलेकर पैर तकहोनाचाहिए. लिफ़ाफ़ा(चादर), इज़ारसेथोड़ा लंबाहोऔरकमीज(कुर्ता) गर्दन सेपैरतकहोनाचाहिए....
اور پڑھوमय्यित को नेहलाने का तरीक़ा-भाग-२
वुज़ु गुसल देनेवाला मय्यित को इस्तिन्जा कराने के बाद वुज़ु कराए. मय्यित को वुज़ु कराने का तरीक़ा वही है जो जीवित शख़्स के लिए है.(जो सुन्नतें जीवित शख़्स के लिए हैं, मय्यित को वुज़ु कराने में भी उन का ख़्याल रख्खा जाएगा) मात्र इतना फ़र्क़ है के मय्यित को कुल्ली …
اور پڑھوमय्यित को नेहलाने का तरीक़ा-भाग-१
जब मय्यित के गुसलऔर कफ़न दफ़न का प्रबंध हो जाए, तो मय्यित को स्ट्रेचर या तख़्त पर लिटा देंऔर गुसल के लिए ले जाऐं. अगर मुमकिन हो तो तख़्त यास्ट्रेचर को तीन, पांच या सात दफ़ा किसी ख़ुश्बुदारचीज़ की धुनी दे दें, ताकि अगर मय्यित के बदन से किसी प्रकार की बदबू ख़ारिज हो...
اور پڑھوमौत के बाद तुरंत क्या करना चाहिए ?
जब किसी की रूह निकल जाए, तो उस की आंखें बंद कर दो, सारे अंग ठीक कर दो, हाथों को उस के किनारे कर दो, उंगलियों और जोड़ों को ढीला कर दो, मुंह को इस तरीक़े से बांध दो के एक कपड़ा थोड़ी के नीचे से निकालो और उस के …
اور پڑھوमौत के वक़्त कलमए शहादत की तलक़ीन
जो लोग क़रीबुल मर्ग (मरने वाले) के पास बैठे हों, उन के लिए मुस्तहब है के आवाज़ के साथ कलमए शहादत पढ़हें, ताकि उन का कलमा सुन कर क़रीबुल मर्ग (मरनेवाला) भी कलमा पढ़ने लगे.(इस को शरीअत में कलमए शहादत की तलक़ीन कहा जाता है...
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