(१२) अगर मय्यित नाबालिग़ लड़का हो, तो निम्नलिखित दुआ पढ़ी जाएः اَللّٰهُمَّ اجْعَلْهُ لَنَا فَرَطًا وَّاجْعَلْهُ لَنَا اَجْرًا وَّذُخْرًا وَّاجْعَلْهُ لَنَا شَافِعًا وَّمُشَفَّعًا ए अल्लाह! उस बच्चे को हमारे लिए पेश रव बना(यअनी वह आख़िरत महुंच कर हमारे लिए राहत और आराम के असबाब तैय्यार कराए) और उस को हमारे …
اور پڑھوजनाज़े की नमाज़ का तरीक़ा
जनाज़े की नमाज़ अदा करने का मस्नून तरीक़ा निम्नलिखित हैः (१) मय्यित को इमाम के सामने इस तरह रख्खा जाए के उस का सर इमाम के दायीं जानिब हो और उस का पैर इमाम के बायीं जानिब हो इसी तरह के मय्यित को इस तरह रख्खा जाए के उस के …
اور پڑھوजनाज़े की नमाज़
इस्लाम धर्म ने मुसलमानों को हुक़ूक़ुल्लाह(अल्लाह तआला के अधिकार) और हुक़ूक़ुल इबाद(बंदो के अधिकार) अदा करने का आदेश दिया है. हुक़ूक़ुल इबाद(बंदो के अधिकार) में से दो तरह के अधिकार होते हैं...
اور پڑھوग़ैर मुस्लिम रिश्तेदार को ग़ुसल देना
अगर किसी मुसलमान के क़रीबी ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार का मृत्यु हो जाए, तो उस की लाश उस के(मय्यित के)ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार के हवाले कर दी जाए या उन लोगों के हवाले कर दी जाए जो मय्यित के धर्म के माननेवाले हैं. और अगर मय्यित के ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार न हों या ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार हों...
اور پڑھوन पहचानने योग्य लाशों को कैसे दफनाया जाए?
अगर मुसलमानों और ग़ैर मुस्लिमों का एक साथ इन्तेक़ाल (मृत्यु) हो जाए (जैसा के भूकंप और बाढ़ वग़ैरह में होता है) और मुसलमानों और ग़ैर मुस्लिमों की लाशों में फ़र्क करना अशक्य हो, तो उस की विभिन्न सूरतें है...
اور پڑھوइस्लाम क़बूल करने का तरीक़ा
जो शख़्स इस्लाम क़बूल करना चाहे, तो उस के लिए ज़रूरी है के वह गवाही दे के अल्लाह तआला तमाम मख़लूक के हक़ीक़ी माबूद हैं और वह अपनी ज़ात व सिफ़ात में तन्हा हैं और उस का कोई हिस्सेदार नहीं है...
اور پڑھوन पहचानने योग्य लाशों का ग़ुसल और जनाज़ा नमाज़
अगर कोई लाश मिले और यह मालूम न हो के वह मुसलमान की लाश है या काफ़िर की, तो निम्नलिखित अहकाम(आदेश) संबंधित है...
اور پڑھوलाश का कुछ हिस्सा मिले तो कैसे ग़ुसल दिया जाए?
(१) अगर मय्यित का सिर्फ सर मिले और जिस्म न मिले, तो ग़ुसल देना वाजिब नहीं होगा, बल्कि सिर्फ सर को दफ़न कर दिया जाएगा...
اور پڑھوहालते एहराम में इन्तेक़ाल होने वाले की तजहिज़ व तकफ़ीन
अगर किसी शख़्स का हालते एहराम में इन्तेक़ाल हो जाए(चाहे उसने हज का एहराम बांधा हो या उमरह का), उस की तजहिज़ व तकफ़ीन साधारण हालात में मरने वाले की तरह की जाएगी यअनी उस को शरीअत के अनुसार ग़ुसल दिया जाऐगा और कफ़न पहनाया जाएगा...
اور پڑھوमुसलमान औरत(स्त्री) की ग़ैर मौजूदगी में मुसलमान औरत को ग़ुसल देने के अहकाम(आदेश)
अगर किसी की बीवी(पत्नी) का इन्तेक़ाल(मृत्यु) हो जाए और उस को ग़ुसल देने वाली कोई मुस्लिम औरत(स्त्री) मौजूद न हो, फिर भी शोहर(पति) के लिए जाईज़ नहीं है के उस को ग़ुसल दे या उस के बदन को नंगे हाथ मस करे...
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