जनाज़े की नमाज़ के सहीह होने के लिए दो क़िसम की शरतें हैः (१) नमाज़ से मुतअल्लिक़ शरतें और (२) मय्यित से मुतअल्लिक़ शरतैं. नमाज़ से मुतअल्लिक़ शराईतः जनाज़े की नमाज़ की सिहत के लिए बिअयनिही वह शरतें हैं, जो आम नमाज़ों की सिहत के लिए ज़रूरी हैं यअनीः (१) …
और पढ़ो »नमाज़े जनाज़ा के फ़राईज़ और सुन्नते
नमाज़े जनाज़ा में दो चीजें फ़र्ज़ हैः (१) चारों तकबीरें केहना. (२) खड़े हो कर नमाज़े जनाज़ा पढ़ना मगर यह के कोई माज़ूर(लाचार,विविश) हो, तो उस के लिए बैढ़ कर पढ़ने की भी गुंजाईश है...
और पढ़ो »जनाज़े की नमाज़ में पढ़ने की दुआ
(१२) अगर मय्यित नाबालिग़ लड़का हो, तो निम्नलिखित दुआ पढ़ी जाएः اَللّٰهُمَّ اجْعَلْهُ لَنَا فَرَطًا وَّاجْعَلْهُ لَنَا اَجْرًا وَّذُخْرًا وَّاجْعَلْهُ لَنَا شَافِعًا وَّمُشَفَّعًا ए अल्लाह! उस बच्चे को हमारे लिए पेश रव बना(यअनी वह आख़िरत महुंच कर हमारे लिए राहत और आराम के असबाब तैय्यार कराए) और उस को हमारे …
और पढ़ो »जनाज़े की नमाज़ का तरीक़ा
जनाज़े की नमाज़ अदा करने का मस्नून तरीक़ा निम्नलिखित हैः (१) मय्यित को इमाम के सामने इस तरह रख्खा जाए के उस का सर इमाम के दायीं जानिब हो और उस का पैर इमाम के बायीं जानिब हो इसी तरह के मय्यित को इस तरह रख्खा जाए के उस के …
और पढ़ो »जनाज़े की नमाज़
इस्लाम धर्म ने मुसलमानों को हुक़ूक़ुल्लाह(अल्लाह तआला के अधिकार) और हुक़ूक़ुल इबाद(बंदो के अधिकार) अदा करने का आदेश दिया है. हुक़ूक़ुल इबाद(बंदो के अधिकार) में से दो तरह के अधिकार होते हैं...
और पढ़ो »ग़ैर मुस्लिम रिश्तेदार को ग़ुसल देना
अगर किसी मुसलमान के क़रीबी ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार का मृत्यु हो जाए, तो उस की लाश उस के(मय्यित के)ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार के हवाले कर दी जाए या उन लोगों के हवाले कर दी जाए जो मय्यित के धर्म के माननेवाले हैं. और अगर मय्यित के ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार न हों या ग़ैरमुस्लिम रिश्तेदार हों...
और पढ़ो »न पहचानने योग्य लाशों को कैसे दफनाया जाए?
अगर मुसलमानों और ग़ैर मुस्लिमों का एक साथ इन्तेक़ाल (मृत्यु) हो जाए (जैसा के भूकंप और बाढ़ वग़ैरह में होता है) और मुसलमानों और ग़ैर मुस्लिमों की लाशों में फ़र्क करना अशक्य हो, तो उस की विभिन्न सूरतें है...
और पढ़ो »इस्लाम क़बूल करने का तरीक़ा
जो शख़्स इस्लाम क़बूल करना चाहे, तो उस के लिए ज़रूरी है के वह गवाही दे के अल्लाह तआला तमाम मख़लूक के हक़ीक़ी माबूद हैं और वह अपनी ज़ात व सिफ़ात में तन्हा हैं और उस का कोई हिस्सेदार नहीं है...
और पढ़ो »न पहचानने योग्य लाशों का ग़ुसल और जनाज़ा नमाज़
अगर कोई लाश मिले और यह मालूम न हो के वह मुसलमान की लाश है या काफ़िर की, तो निम्नलिखित अहकाम(आदेश) संबंधित है...
और पढ़ो »लाश का कुछ हिस्सा मिले तो कैसे ग़ुसल दिया जाए?
(१) अगर मय्यित का सिर्फ सर मिले और जिस्म न मिले, तो ग़ुसल देना वाजिब नहीं होगा, बल्कि सिर्फ सर को दफ़न कर दिया जाएगा...
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