हज़रत कअब बिन ‘उजरा रद़िय अल्लाहु अन्हू फ़रमाते हैं कि जब निम्नलिखित आयते-शरीफ़ा नाज़िल हुईः إِنَّ الله وَمَلئِٰكَتَهُ يُصَلُّوْنَ عَلٰى النِّبِيِّ يٰأَيُّهَا الَّذِيْنَ آمَنُوْا صَلُّوْا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوْا تَسْلِيْمًا बेशक अल्लाह और उन के फ़रिश्ते नबी (सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम) पर दुरूद भेजते हैं (यानी अल्लाह तआला नबी सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम पर …
اور پڑھوसलात ‘अलन्नबी के मायने
‘उलमा ने यहाँ ‘सलात ‘अलन्नबी (नबी पर दरूद भेजने) के कई मायने बयान किए हैं। हर जगह जो मायने अल्लाह त’आला, फ़रिश्तों और मोमिनों के हाल के मुनासिब होंगे, वही मुराद लिए जाएँगे। कुछ ‘उलमा ने लिखा है कि “सलात ‘अलन्नबी” का मतलब नबी की सना (तारीफ़) और ताज़ीम, रहमत …
اور پڑھوअमर बिल मरूफ और नही अनिल मुन्कर की जिम्मेदारी नौवीं क़िस्त
चार जिम्मेदारियाँ दीन की सुरक्षा की बुनियाद दुनिया में दीन कायम करने के लिए अल्लाह तआला ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को चार बुनियादी जिम्मेदारियाँ देकर भेजा था। वे चार जिम्मेदारियाँ यह थीं: (1) उम्मत को कुरआन मजीद की तिलावत का सही तरीका सिखाना (2) उन्हें दीन की तालीम और …
اور پڑھوइत्तिबा-ए-सुन्नत का एहतिमाम – ११
हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हज़रत हकीमुल-उम्मत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहमतुल्लाही ‘अलैह हाल के ज़माने के एक बहुत बड़े आलिमे-दीन और बुज़ुर्ग थे। हज़रत रह़्मतुल्लाही ‘अलैह सन १२८० हिजरी में थाना भवन में पैदा हुए और १६ रजब १३६२ हिजरी (मुताबिक २० जुलाई १९४३) को ८३ साल …
اور پڑھوक़ुरआन मजीद में दुरूद का हुक्म
क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला ने अपने बन्दों को कुछ कामों का हुक्म दिया है, जैसे कि नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात वग़ैरह। इसी तरह क़ुरआन मजीद में कुछ ऐसी आयतें भी हैं, जिनमें अल्लाह तअ़ाला अपने कुछ ख़ास बन्दों की इज़्ज़त अफ़ज़ाई फ़रमाता है …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: ८४)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अज़ीम कुर्बानियां अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर अलग-अलग आज़माइश और इम्तिहान डाले और वे हर इम्तिहान और आज़माइश में पूरी तरह फ़रमां-बरदारी दिखाते हुए कामयाब हुए। दर-हकीकत हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की रज़ा के लिए जो अपनी ज़िंदगी में अज़ीम कुर्बानियां दी थीं, …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: ८३)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का रास्ता: अक्लमंदी का रास्ता कुरान-मजीद में अल्लाह तआला ने साफ़ तौर पर ऐलान फरमाया है कि जो शख्स हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के रास्ते से मुंह मोड़कर उसे छोड़ दे और किसी और रास्ते पर चले, तो हकीकत में वह बेवकूफ है, जो जहालत के रास्ते पर …
اور پڑھوक़ियामत की निशानियां – आठवीं क़िस्त
दज्जाल की आमद (आने) से पहले उम्मत का गिरना हदीस शरीफ़ में आया है कि क़ियामत से पहले लोगों की ज़िंदगी का सब से पहला मक़सद और असल मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा माल जमा करना होगा। लोग माल को इस निगाह से देखेंगे कि माल ही तमाम राहतों और आसानी …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: ८२)
“खलीलुल्लाह” के लक़ब से नवाज़ा जाना तमाम नबियों में से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को “खलीलुल्लाह” (अल्लाह के खास दोस्त) के खिताब से नवाज़ा गया। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को यह शर्फ कैसे मिला, इसके बारे में अल्लामा इब्ने-कसीर रह़िमहुल्लाह ने यह वाक्या बयान किया है: हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यह आदत-ए-शरीफा …
اور پڑھوमोहब्बत का बाग (किस्त: 81)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बुलंद मकाम अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त के तमाम बंदों में से नबियों (पैग़ंबरों) का इस्लाम सबसे ऊंचे और सबसे बेहतर दर्जे का था। अल्लाह तआला ने उन्हें इन्सानियत की रहनुमाई (मार्गदर्शन) के लिए चुना था और उन्हें दुनिया में इस मकसद के लिए भेजा कि वे लोगों को …
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