हज़रत अली रजि० का एक क़ब्र पर गुज़र कुमैल रजि० एक शख्स हैं, कहते हैं कि मैं हज़रत अली कर्रमल्लाहु बज्हहू के साथ एक मर्तबा जा रहा था। वह जंगल में पहुंचे, फिर एक मक्बरे की तरफ़ मुतवज्जह हुए और फ़रमाया: ऐ मक्बरे वालो! ऐ बोसीदगी वालो! एक वहशत और …
اور پڑھوताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
एक हज़ार दिन तक सत्तर फरिश्तों का सवाब लिखना
عن ابن عباس رضي الله عنهما قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم من قال جزى الله عنا محمدا بما هو أه…
सूरह-फलक़ और सूरह-नास की तफ़सीर – प्रस्तावना
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ﴿١﴾ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम को दुरूद पहोंचाने वाला फ़रिश्ता
عن عمار بن ياسر رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إن الله وكل بقبري ملكا أعطاه الله أسماء الخلائق فلا يصلي علي أحد إلى يوم القيامة إلا أبلغني باسمه واسم أبيه هذا فلان بن فلان قد صلى عليك (رواه البزار كما في الترغيب والترهيب، الرقم: …
اور پڑھوफज़ाइले-आमाल – ३९
हज़रत अली बिन माबद रह का किराये के मकान से तहरीर को ख़ुश्क करना अली बिन माबद रह० एक मुहद्दिस हैं, फर्माते हैं, मैं एक किराये के मकान में रहता था। एक मर्तबा मैंने कुछ लिखा और उसको खुश्क करने के लिए मिट्टी की _ ज़रूरत हुई कच्ची दीवार थी। …
اور پڑھوसूरह-नास की तफ़सीर
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ﴿١﴾ مَلِكِ النَّاسِ ﴿٢﴾ إِلَٰهِ النَّاسِ ﴿٣﴾ مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ﴿٤﴾ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ﴿٥﴾ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ﴿٦﴾ आप (ऐ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम लोगों से) कह दीजिए कि मैं पनाह मांगता हूं लोगो के रब की (१) लोगो के बादशाह की (२) लोगो के मा’बूद (खुदा) की (३) उस वसवसा डालने वाले …
اور پڑھوनफ़्ल नमाज़ तोड़ने की क़ज़ा
सवाल: मैंने तहिय्यतुल-मस्जिद की दो रकात नफ़्ल नमाज़ शुरू की और उसी दौरान फ़र्ज़ नमाज़ शुरू हो गई। मैंने फ़ौरन अपनी दो रकात नफ़्ल नमाज़ से निकलने के लिए सलाम फेर दिया। क्या मेरे ऊपर वाजिब है कि मैं उन दो रकात की क़ज़ा करूँ, जिनको मैंने शुरू करके तोड़ …
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