ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
एक हज़ार दिन तक सत्तर फरिश्तों का सवाब लिखना
عن ابن عباس رضي الله عنهما قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم من قال جزى الله عنا محمدا بما هو أه…
सूरह-फलक़ और सूरह-नास की तफ़सीर – प्रस्तावना
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ﴿١﴾ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
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शोहरत के मुताल्लिक़ मज़ाक़
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़मतुल्लाहि ‘अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: उम्मत की ख़िदमत और उनके दीन की हिफ़ाज़त करना चाहिए। अपनी शोहरत में क्या रखा है? शोहरत के मुताल्लिक़ तो बस यह मज़ाक़ (रग़बत,चाहत) चाहिए कि न ज़िंदगी में किसी को ख़बर हो कि फ़ुलां शख़्स भी दुनिया …
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों के साथ हुस्ने-सुलूक (अच्छा व्यवहार)
عن عيسى بن عميلة رحمه الله أنه قال: أخبرني من رأى أبا ذر يحلب غنيمة له، فيبدأ بجيرانه وأضيافه قبل نفسه. (من سير أعلام النبلاء ٣/٣٩٩) ईसा बिन-उमैलह रह़िमहुल्लाह ने एक ऐसे शख़्स से नक़ल किया है जिन्होंने हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु का अपने पड़ोसियों और मेहमानों के साथ हुस्ने-सुलूक …
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की सच्चाई के बारे में रसूले-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की गवाही
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ما أظلت الخضراء (أي: السماء) ولا أقلت الغبراء (أي: الأرض) أصدق من أبي ذر. (سنن الترمذي، الرقم: ٣٨٠١) एक मौका पर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु से ज़्यादा कोई सच्चा नहीं …
اور پڑھوअज़ान सुन कर दुरूद-शरीफ़ पढ़ना
लोगों ने ख़ल्लाद बिन कषीर की बीवी से उस की वजह पूछी, तो उन्होंने जवाब दिया के उस का मामूल (नियम) था के हर जुम्आ को निम्नलिखित दुरूद को एक हज़ार मर्तबा पढ़ते थेः
اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ...
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