रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के साथ हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु की क़ुरबत (नज़दीकी)

हज़रत अबू-मूसा अशअ़री रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं:

“जब मैं और मेरा भाई यमन से (मदीना मुनव्वरा) आए, तो कुछ अर्से के लिए हमने यही समझा कि अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु और उनकी वालिदा (माँ) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के घरानों में से ही हैं; क्योंकि वे कसरत से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के घर आया-जाया करते थे और वे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के बहुत क़रीब थे।”

हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु का अबू-जहल को क़त्ल करना

ग़ज़वा-ए-बद्र में जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम और सहाबा-ए-किराम रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हुम को फ़तह (जीत) हासिल हुई, तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने सहाबा-ए-किराम से फ़रमाया: “कौन जाकर देखेगा कि अबू-जहल किस हाल में है? (यानी क्या वह ज़िंदा है या मर गया?)”

हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु उसकी तलाश में निकले, तो उन्हें मालूम हुआ कि अ़फ़रा रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हा के दो बेटों ने उसे ज़ख़्मी कर दिया था और वह मरने के क़रीब था।

हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु उसके पास आए और अपना पाँव उसकी गर्दन पर रखा। हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु ने उसकी दाढ़ी भी पकड़ ली और उसे मुख़ातब करके कहा: “क्या तू ही अबू-जहल है! ऐ अल्लाह के दुश्मन! अल्लाह त’आला ने तुझे रुसवा कर दिया!”

अबू-जहल ने कहा: “क्या तुम लोगों ने मुझसे बड़े किसी आदमी को क़त्ल किया है?” उसने हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु से यह भी कहा: “ऐ छोटे चरवाहे! तुम एक बुलंद और दुश्वार पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हो।” (अबू-जहल मौत के वक़्त भी फ़ख़्र व तकब्बुर में फूला हुआ था)।

अबू-जहल ने कहा: “काश कि कोई और शख़्स मुझे क़त्ल करता, तुम जैसे काश्तकार के अलावा (ताकि वह मेरे लिए इज़्ज़त की बात होती)।”

अबू-जहल ने हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु से यह भी कहा: “जब तुम मेरा सर क़लम करो (काटो), तो मेरी गर्दन के निचले हिस्से से कंधों के क़रीब से काटना, ताकि जब लोग मेरे सर को देखें तो वह लोगों के लिए ज़ियादा रोब का सबब हो (और मेरा सर दूसरे मारे गए लोगों के सरों से ज़ियादा ऊँचा नज़र आए)।”

अबू-जहल ने हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु से मज़ीद यह कहा: “जब तुम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के पास वापस जाओ, तो उनको मेरी यह ख़बर पहुँचाना कि आज मेरी नफ़रत उनके लिए पहले से कहीं ज़ियादा है। इसी तरह मैं अपनी पूरी ज़िंदगी में हमेशा अल्लाह त’आला का दुश्मन रहा; लेकिन आज अल्लाह त’आला से मेरी दुश्मनी पहले से कहीं ज़ियादा है।”

इसके बाद हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु ने अपनी तलवार से अबू-जहल का सर क़लम कर दिया और उसके सर को लेकर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम की ख़िदमत में आए और अर्ज़ किया: “यह अल्लाह के दुश्मन अबू-जहल का सर है।”

नबी करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने ख़ुशी से पूछा: “अल्लाह की क़सम! क्या वाक़ई यह अबू-जहल का सर है?”

हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु ने अल्लाह की क़सम खाकर कहा: “हाँ, यह अबू-जहल का सर है।”

इसके बाद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने फ़रमाया:

الله أكبر، الحمد لله الذي صدق وعده، ونصر عبده، وهزم الأحزاب وحده

अल्लाह सबसे बड़ा है! तमाम तारीफ़ें अल्लाह त’आला के लिए हैं जिसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की और अकेले ही तमाम लश्करों को शिकस्त दी!”

फिर नबी करीम सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु से फ़रमाया: “मुझे दिखाओ कि अबू-जहल की लाश कहाँ है?”

जब हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम को अबू-जहल की लाश के पास ले गए, तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने तीन मर्तबा यह कलिमात फ़रमाए:

الحمد لله الذي أعز الإسلام وأهله ‏

“तमाम तारीफ़ें अल्लाह त’आला के लिए हैं, जिसने इस्लाम और अह्ले-इस्लाम को इज़्ज़त बख़्शी।”

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने यह भी फ़रमाया: “यह इस उम्मत का फ़िरऔन है।”

फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु को (माले-ग़नीमत में से) अबू-जहल की तलवार अता फ़रमाई।

(सह़ीह़ बुख़ारी: ४०२०, मुस्नद अहमद: ४२४७, फ़तह़ुल-बारी: ७/२९५, शरह़ुज़-ज़रक़ानी: २/२९८, शरह़ अल-सियर अल-कबीर: पेज. ६००)

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