सवाल: अगर मेरी फ़ज्र की नमाज़ क़ज़ा हो जाए और मैं सोकर उठने के बाद उसे ज़ुहर से पहले (यानी ज़वाल से पहले) पढ़ूँ, तो क्या मैं पहले फ़ज्र की दो रकात सुन्नत पढ़ूँ और फिर फ़र्ज़, या सिर्फ़ फ़र्ज़ पढ़ूँ?
जवाब: अगर कोई आदमी उसी दिन की फ़ज्र की नमाज़ की क़ज़ा ज़वाल से पहले पढ़े, तो उसे चाहिए कि वह फ़ज्र की फ़र्ज़ से पहले दो रकात सुन्नत भी पढ़े।
अलबत्ता, अगर कोई आदमी फ़ज्र की नमाज़ की क़ज़ा ज़वाल के बाद पढ़े या वह किसी दूसरे दिन की फ़ज्र की नमाज़ की क़ज़ा पढ़े, तो वह फ़ज्र की दो रकात सुन्नत नहीं पढ़ेगा; बल्कि वह सिर्फ़ फ़ज्र की फ़र्ज़ नमाज़ की क़ज़ा करेगा।
फ़क़त और अल्लाह तअ़ाला ही सब से ज़्यादा जानने वाले हैं।
दारुल-इफ़्ता, मद्रसा तालीमुद्दीन
इसपिंगो बीच, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका
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