
عن ابن عمر رضي الله عنهما عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: من زار قبري بعد موتي كان كمن زارني في حياتي (المعجم الأوسط، الرقم: ۲۸۷) رواه الطبراني والدارقطني والبيهقي وضعفه كذا في الإتحاف وفي المشكوة برواية البيهقي في الشعب بلفظ: من حج فزار قبري بعد موتي كان كمن زارني في حياتي واستدل به الموفق في المغني على استحباب الزيارة (فضائلِ حج صـ ۹۷)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन-उमर रद़ियल्लाहु ‘अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने इरशाद फ़रमायाः जो शख़्स मेरी वफ़ात के बाद मेरी क़बर की ज़ियारत करे, वह उस शख़्स की तरह होगा जिस ने मेरी ज़िन्दगी में मेरी ज़ियारत की।
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की ख़ुशी
इमाम तबरानी रह़िमहुल्लाह ने अपनी दुआ की किताब में बयान किया है कि उन्हें एक मर्तबा ख़्वाब में नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की ज़ियारत का शर्फ़ हासिल हुआ। नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की हैअत (दिखावट) हुबहू वही थी जो अहादीसे-मुबारका में बयान की गई है।
इमाम तबरानी रह़िमहुल्लाह ने आप सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को सलाम किया और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ! अल्लाह तअ़ाला ने मेरे दिल में कुछ कलिमात का इलक़ा किया है (डाला है), क्या मैं उन को आप के सामने अर्ज़ करूं? नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने फ़रमायाः वह कलिमात क्या हैं? इमाम तबरानी रह़िमहुल्लाह ने जवाब दियाः
اَللّٰهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ بِعَدَدِ مَنْ حَمِدَكَ وَلَكَ الْحَمْدُ بِعَدَدِ مَنْ لَمْ يَحْمَدْكَ وَلَكَ الْحَمْدُ كَمَا تُحِبُّ أَنْ تُحْمَدَ اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ بِعَدَدِ مَنْ صَلَٰى عَلَيْهِ وَصَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ بِعَدَدِ مَنْ لَمْ يُصَلِّ عَلَيْهِ وَصَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ كَمَا تُحِبُّ أَنْ يُصَلّٰى عَلَيْهِ
ऐ अल्लाह! आप ही के लिए तारीफ़ है उन लोगों की तादाद के बक़दर जिन्होंने आप की तारीफ़ की और आप ही के लिए तारीफ़ है उन लोगों की तादाद के बक़दर जिन्होंने आप की तारीफ़ नहीं की और आप ही के लिए तारीफ़ है जिस तरह आप अपनी तारीफ़ पसंद फ़रमाते हैं. ऐ अल्लाह! मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) पर दुरूद भेजिए उन लोगों की तादाद के बराबर जिन्होंने उन पर दुरूद भेजा और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) पर दुरूद नाज़िल फ़रमा उन लोगों की तादाद के बराबर जिन्होंने उन पर दुरूद नहीं भेजा और मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम) पर दुरूद भेजिए जिस तरह आप उन पर दुरूद भेजना पसंद फ़रमाते हैं।
अल्लाह सुब्हानहु व त’आला की हम्दो-सना और दुरूद-शरीफ़ के इन मुअज़ज़ और शानदार कलिमात सुन कर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम बहुत ज़्यादा ख़ुश हुए और इतना मुस्कुराए के सामने के मुबारक दांत ज़ाहिर हो गए और उन के दरमियान रौशनी नज़र आने लगी. (अल-क़व्लुल बदीअ़, पेज नं-१३०)
يَا رَبِّ صَلِّ وَسَلِّم دَائِمًا أَبَدًا عَلَى حَبِيبِكَ خَيرِ الْخَلْقِ كُلِّهِمِ
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