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इत्तेबाए सुन्नत का प्रबंध – २

हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही (रह.) और उन की इत्तेबाए सुन्नत का प्रबंध हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही (रह.) महान दीन के आलिम, जलील मुहद्दिष, बहोत बड़े फ़क़ीह और अपने ज़माने के वलीए कामिल थे. उन का सिलसिलए नसब वंशावली मशहूर सहाबी हज़रत अबु अय्यूब अन्सारी (रज़ि.) तक पहोंचता था. …

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हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम की मोहब्बत अपनी ज़ात से भी ज़्यादा

उस ज़ात की क़सम जिस के क़ब्ज़े में मेरी जान है (तुम्हारा इमान उस वक़्त तक मुकम्मल नहीं होगा) जब तक के में तुम्हारे नज़दीक तुम्हारी ज़ात से भी ज़्यादा महबूब न हो जावुं. हज़रत उमर (रज़ि.) ने फ़रमायाः बेशक अल्लाह की क़सम अब आप से मुझ अपनी ज़ात से भी ज़्यादा मोहब्बत है...

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सुरए क़ुरैश की तफ़सीर

क़ुरैश की इज़्ज़त तथा महानता का ज़ाहिरी सबब यह है के उन के अन्दर कुछ उच्च अख़लाक़ तथा अवसाफ़ थे. जैसे अमानत दारी, शुकर गुज़ारी, लोगों की रिआयत, उन के साथ हुस्ने सुलूक (अच्छा व्यव्हार) और बे बस लाचार लोगों और मज़लूमों की मदद करना वग़ैरह. इस प्रकार के उच्च अख़लाक़ तथा अवसाफ़ क़ुरैश की सरीश्त और फ़ितरत में दाख़िल थे. यही वजह है के अल्लाह तआला ने उन्हें अपने घर काबा शरीफ़ की ख़िदमत का शरफ़ अता फ़रमाया...

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मोहब्बत का बग़ीचा (तेईसवां प्रकरण)‎

بسم الله الرحمن الرحيم वालिदैन के महान अधिकार अल्लाह सुब्हानहु वतआला की अता करदा बड़ी नेअमतों में से वालिदैन की नेअमत है. वालिदैन की नेअमत इतनी अज़िमुश्शान नेअमत है के उस नेअमत का कोई बदल नही है और यह नेअमत एसी है के इन्सान को अपने जिवन में एक ही …

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सालिहीन की इत्तेबाअ

प्यारो ! आदमी अपने आप से नहीं बढ़ता अल्लाह जल्ल शानुहु जैसे बढ़ावे वही बढ़ता है अपने आप को ख़ूब गिरावो, अपने समकालिन (मुआसिरीन) में से हर एक को अपने से बड़ा समझो...

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