मदीना मुनव्वरह की सुन्नतें और आदाब (१) हज्ज तथा उमरह अदा करने के बाद आप इस बात का प्रबंध करें के आप मदीना मुनव्वरह जाऐं और रवज़ए मुबारक की ज़ियारत करें, क्युंकि हदीष शरीफ़ में नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के जिस शख़्स ने हज्ज किया और …
اور پڑھوरसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम को दुरूद पहोंचाने वाला फ़रिश्ता
عن عمار بن ياسر رضي الله عنه قال : قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : إن لله ملكا أعطاه أسماع الخلائ…
सबसे बेहतरीन दुरूद
हज़रत कअब बिन ‘उजरा रद़िय अल्लाहु अन्हू फ़रमाते हैं कि जब निम्नलिखित आयते-शरीफ़ा नाज़िल हुईः إِنَّ ا…
मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ४
मरीज़ की इयादत के वक़्त की दुआएं पेहली दुआः لَا بَأْسَ طَهُوْرٌ إِنْ شَاءَ اللهُ “घबराने की कोई बात …
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु से मोहब्बत
जब हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु को हज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु के इंतक़ाल की …
दीन की ख़ातिर अल्लाह तआला का दिया हुआ तोहफा इस्तेमाल करना
हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रह़मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: وَمِمَّا رَزَقْنَاهُ…
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मदीना मुनव्वरह की सुन्नतें और आदाब – २
रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के रवज़ए मुबारक की ज़ियारत के फ़ज़ाईल नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की शफ़ाअत का हुसूल हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमायाः जो शख़्स मेरी क़बर की ज़ियारत करे, उस के लिए मेरी शफ़ाअत वाजिब …
اور پڑھوमदीना मुनव्वरह की सुन्नतें और आदाब – १
मदीना मुनव्वरह की ज़ियारत मदीना मुनव्वरह में हज़रत रसूले ख़ुदा (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के रवज़ए मुबारक पर हाज़री इन्तिहाई अज़ीम सआदत और बड़ी नेअमतों में से है जिस से किसी मोमिन को सरफ़राज़ किया जा सकता है. अल्लाह सुब्हानहु वतआला जिस शख़्स को यह सआदत नसीब फ़रमाए, उस को चाहिए …
اور پڑھوदुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से ज़रूरतों की तकमील
“जो शख़्स मेरी क़बर के पास खड़ा हो कर मुझ पर दुरूद पढ़ता है में उस को ख़ुद सुनता हुं और जो किसी और जगह दुरूद पढ़ता है तो उस की दुनिया और आख़िरत की ज़रूरतें पूरी की जाती हैं और में क़यामत के दिन उस का गवाह और उस का सिफ़ारिशी होवुंगा”...
اور پڑھوक़ुर्बानी की सुन्नतें और आदाब
(१) दीने-इस्लाम में क़ुर्बानी एक अज़ीम और मोहतम-बिश-शान इबादत है. चुनांचे क़ुर्आने-करीम में विशेष तौर पर ज़िकर किया गया है. तथा क़ुर्आने-पाक और अहादीसे-मुबारका में उस की बहोत सी फ़ज़ीलतें बयान की गई हैं। अल्लाह सुब्हानहु व तआला का इरशाद हैः لَن يَنَالَ اللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَاؤُهَا وَلَٰكِن يَنَالُهُ التَّقْوَىٰ …
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