हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “कुफ़र जड़ है तमाम अख़लाक़े रज़ीला (घटिया अख़लाक़) की और इस्लाम जड़ है तमाम अख़लाक़े हमीदा (अच्छे अख़लाक़) की, इस लिए कुफ़र के होते हुए इत्तिफ़ाक़ होना (सहमत होना) अत्यंत अजीब (ताज्जुब) है और इस्लाम के होते हुए ना …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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क़ुर्आने करीम में सहाबए किराम (रज़ि.) की तारीफ़ तथा प्रशंसा
रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़बर गीरी के लिए एक अन्सारी महिला की बैचेनी उहद की लऱाई में मुसलमानों को तकलीफ़ भी बोहत पहुंची और शहीद भी बोहत हुए. मदीना तय्यीबा में यह वहशत अषर ख़बर पहुंची तो औरतें परेशान होकर हाल की स्थिति की जांच के लिए घर से निकल …
اور پڑھوतलाक़ की सुन्नतें और आदाब – ३
तलाक़ की सुन्नतें और आदाब (१) शौहर जल्द बाज़ी अथवा ग़ुस्से की हालत में अपनी बिवी को तलाक़ न दे, बलकि तलाक़ देने से पेहले उस को चाहिए के वह संजीदगी से इस मामले पर अच्छी तरह ग़ौरो फ़िकर करे. अच्छी तरह ग़ौरो फ़िकर करने के बाद अगर उस को …
اور پڑھوतलाक़ की सुन्नतें और आदाब – २
वैवाहिक विवाद को ख़तम करना जब मियां बिवी के दरमियान तलाक़ के ज़रीए फ़ुरक़त (जुदाई) होती है, तो उस वक़्त दो अफ़राद जुदा नहीं होते हैं, बलके दो ख़ानदानों में अलाहीदगी होती है. उस के अलावह अगर मियां बिवी के बच्चे हों, तो मियां बिवी की अलाहीदगी की वजह से …
اور پڑھوतलाक़ की सुन्नतें और आदाब- १
तलाक़ निकाह का मक़सद यह है के मियां बिवी पाकीज़ा ज़िन्दगी गुज़ारें और एक दूसरे को अल्लाह तआला के अधिकार और आपस के अधिकार पूरा करने में मदद करें. जिस निकाह में मियां बिवी उलफ़त तथा मोहब्बत के साथ रहें और एक दूसरे के मिज़ाज तथा जज़बता को समझते हुए …
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