قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من سره أن يقرأ القرآن رطبا كما أنزل فليقرأه على قراءة ابن أم عبد (عبد الله بن مسعود) (مسند أبي يعلى، الرقم: ١٩٤) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम ने फ़रमाया: “जो शख़्स क़ुरआन मजीद को उसी तरह (ताज़ा और सही) पढ़ना चाहता है जिस …
اور پڑھوताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु का ज़बरदस्त इल्म
قال التابعي الجليل مسروق رحمه الله: لقد جالست أصحاب محمد صلى الله عليه وسلم، فوجدتهم كالإخاذ (الذي ي…
दुरूद-शरीफ का कई गुना सवाब
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال من صلى علي عشرا صلى الله عليه مئة ومن صلى …
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के हुकूक – ३
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के लिए हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की इताअ़…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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तकब्बुर दूर होने की अलामत
शैखुल-हदीस हज़रत मौलाना मुह़म्मद ज़करिया रह़्मतुल्लाह अलैह ने एक मर्तबा इर्शाद फ़रमाया: एक साहब ने ख़त लिखा था कि किब्र (तकब्बुर) के निकलने की अलामत क्या है? मैंने जवाब में लिखवाया कि अगर कोई तुम पर ए’तिराज़ करे, तनक़ीद करे, बुरा कहे, तो देखो! तुम्हारे क़ल्ब (दिल) पर उस का …
اور پڑھوदुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से ज़रूरतों की तकमील
“जो शख़्स मेरी क़बर के पास खड़ा हो कर मुझ पर दुरूद पढ़ता है में उस को ख़ुद सुनता हुं और जो किसी और जगह दुरूद पढ़ता है तो उस की दुनिया और आख़िरत की ज़रूरतें पूरी की जाती हैं और में क़यामत के दिन उस का गवाह और उस का सिफ़ारिशी होवुंगा”...
اور پڑھوहज़रत अबू-ज़र रज़ियल्लाहु अ़न्हु की ज़िंदगी के आख़िरी लम्हात
لما حضرت سيدنا أبا ذر رضي الله عنه الوفاة، بكت زوجته. فقال لها: ما يبكيك؟ فقالت: وما لي لا أبكي وأنت تموت بفلاة من الأرض قال سيدنا أبو ذر رضي الله عنه: فأبشري ولا تبكي، فإني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم، يقول: لا يموت بين امرأين مسلمين ولدان …
اور پڑھوफज़ाइले-सदकात – ३१
हज़रत लैस बिन-सा’द रह़िमहुल्लाह की सखावत हारून रशीद ने पांच सौ दीनार (अशर्फियां) एक मर्तबा हज़रत इमाम मालिक रह़िमहुल्लाह की नज़र किये। हज़रत लैस बिन-सा’द रह़िमहुल्लाह को इसका इल्म हुआ तो उन्होनें एक हज़ार दीनार हज़रत इमाम मालिक रह़िमहुल्लाह के पास भेजे। बादशाह को इसका इल्म हुआ तो वह नाराज़ …
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