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क़ज़ा की निय्यत से शव्वाल के छ रोज़े रखना

सवाल – में शव्वाल के छ नफ़ल रोज़े क़ज़ा की निय्यत से रखना चाहता हुं, अगर में उन छ नफ़ल रोज़ों को क़ज़ा की निय्यत से रखुं, तो क्या मुझे शव्वाल के उन छ नफ़ल रोज़ों का मख़सूस षवाब (जो हदीष शरीफ़ में वारिद है) मिलेगा?

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अच्छे कर्म करने के अवसर का लाभ

हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “शैतान का यह बहोत बड़ा घोका और फ़रेब है के वह भविष्य में बड़े काम की उम्मीद बंघा कर उस छोटे ख़ैर के काम से रोक देता है जो फ़िलहाल मुमकिन होता है. वह चाहता है के बंदा उस वक़्त …

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शव्वाल के रोज़े की फ़ज़ीलत

सवाल – शव्वाल के छ रोज़े की फ़ज़ीलत वाली हदीष की क्या हैषियत है? क्या यह हदीष अमल के क़ाबिल है या नहीं? तथा हदीष के अलफ़ाज़ क्या हैं. बराए महेरबानी बता दिजीए.

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किसी शख़्स का अपने परिवार के उन अफ़राद की तरफ़ से सदक़ए फ़ित्र अदा करना जिन की वह मदद नहीं करता है

सवाल – अगर कोई शख़्स अपनी बीवी और बालिग़ औलाद (जिन का खर्च वह खुद बरदाश्त नही करता है) की तरफ़ से उन की इजाज़त के बग़ैर उन का सदक़ए फ़ित्र अदा करे, तो क्या उन का सदक़ए फ़ित्र अदा हो जाएगा?

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सदक़ए फ़ित्र वाजिब होने के बाद माल बरबाद हो जाना

सवाल – अगर किसी शख़्स ने सदक़ए फ़ित्र अदा नही किया और उस का सारा माल हलाक हो गया, तो क्या सदक़ए फ़ित्र का वुजूब उस के जिम्मे से साक़ित हो जाएगा?

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