अल्लाह तआला फ़रमाते हैः وَالَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالَّذِينَ آوَوا وَّنَصَرُوا أُولَٰئِكَ هُمُ الْمُؤْمِنُونَ حَقًّا لَّهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ और जो लोग इमान लाए और हिजरत की और अल्लाह के रास्ते में जिहाद किया (यअनी मुहाजिरीन) और जिन लोगों ने (यअनी मुहाजिरीन) और जिन लोगों ने (यअनी अन्सार …
اور پڑھوअबिंया अलैहिमुस्सलाम के नाइबिन
हज़रत मौलाना मुहम्मद इलियास साहब (र.ह.) ने एक बार अपने तलबा से इर्शाद फरमाया: तूम अपनी कदरो कीमत पहच…
हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की नबी ईसा अलैहिस्सलाम से मुशाबहत
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من أحب أن ينظر إلى المسيح عيسى ابن مريم إلى بره وصدقه وجده (اجتهاد…
दूसरे अंबिया अलैहिमुस्सलाम के साथ रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम पर दुरूद भेजना
जब तुम अंबिया (अलै.) पर दुरूद भेजो, तो उन के साथ मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि में भी रसूलों में से एक …
दुरूद-शरीफ न पढ़ना क़ियामत के दिन हसरत और अफ़सोस का सबब
हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़्वाब में ज़ियारत हुई के हुज़ूरे अकद़स (सल्लल्लाहु अलयहि…
मोहब्बत का बाग (किस्त: ८४)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अज़ीम कुर्बानियां अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर अलग-अलग…
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बड़ों के मार्गदर्शन में ज्ञान और स्मरण प्राप्त करने का महत्व
हज़रत मौलाना मुहमंद इल्यास साहब(रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “हमारी इस दीनी दअवत (वतबलीग़) में काम करने वाले (लोग) सब लोगों को यह बात अच्छी तरह समझा देनी चाहिए के तबलीग़ी जमाअतों के निकलने का मक़सद सिर्फ़ दूसरों को (दीन) पोंहचाना और बताना ही नहीं है, बलके इस ज़रीये …
اور پڑھوक़यामत की अलामात (संकेत)- तीसरा प्रकरण
क़यामत की बड़ी अलामतों से पेहले छोटी अलामतों का ज़ुहूर अहादीषे मुबारका में क़यामत की बहोत सी छोटी अलामतें बयान की गई हैं. इन छोटी अलामतों पर ग़ौर करने से हमें मालूम होता है के यह छोटी अलामतें जब पूरे आलम में तिव्रता के साथ रूनुमां होंगी और वह रफ़ता …
اور پڑھوसहाबए किराम (रज़ि.) उम्मत के लिए ख़ैरो भलाई का ज़रीया हैं
रसूले करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “मेरे सहाबा की मिषाल मेरी उम्मत में खाने में नमक की तरह है के खाना बग़ैर नमक के अच्छा (और लज़ीज़) नहीं हो सकता.”(शर्हुस्सुन्नह, रक़म नं- ३८६३) हज़रत ज़ैद बिन दषीना (रज़ि.) की मुहब्बत हज़रत रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के लिए जब …
اور پڑھوमोहब्बत का बग़ीचा (तीसवां प्रकरण)
بسم الله الرحمن الرحيم हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) की बुज़ुर्गी और सच्चाई का क़िस्सा हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रह.) छठ्ठी सदी हीजरी के जलीलुल क़दर उलमा अने उच्च तरीन बुज़ुर्गाने दीन में से थे. अल्लाह तआला ने आप को बे पनाह मक़बूलियत अता फ़रमाई थी जिस की …
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