हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “बड़ी ज़रूरत इस की है के हर व्यक्ति अपनी फ़िकर में लगे और अपने आमाल की इस्लाह करे. आज कल यह मरज़ आाम हो गया है अवाम में भी ख़वास में भी के दूसरों की तो इस्लाह की फ़िकर …
اور پڑھوअबिंया अलैहिमुस्सलाम के नाइबिन
हज़रत मौलाना मुहम्मद इलियास साहब (र.ह.) ने एक बार अपने तलबा से इर्शाद फरमाया: तूम अपनी कदरो कीमत पहच…
हज़रत अबू ज़र रज़ियल्लाहु अन्हु की नबी ईसा अलैहिस्सलाम से मुशाबहत
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: من أحب أن ينظر إلى المسيح عيسى ابن مريم إلى بره وصدقه وجده (اجتهاد…
दूसरे अंबिया अलैहिमुस्सलाम के साथ रसूले-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम पर दुरूद भेजना
जब तुम अंबिया (अलै.) पर दुरूद भेजो, तो उन के साथ मुझ पर दुरूद भेजो, क्युंकि में भी रसूलों में से एक …
दुरूद-शरीफ न पढ़ना क़ियामत के दिन हसरत और अफ़सोस का सबब
हुज़ूरे अक़दस (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की ख़्वाब में ज़ियारत हुई के हुज़ूरे अकद़स (सल्लल्लाहु अलयहि…
मोहब्बत का बाग (किस्त: ८४)
हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की अज़ीम कुर्बानियां अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर अलग-अलग…
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इत्तेबाए सुन्नत का प्रबंध – ४
जुमहूर उम्मत के रास्ते पर चलना और शाज़ अक़वाल से बचवु नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इस बात की भविष्य वाणी फ़रमाई है के एक एसा ज़माना आएगा, जब लोग फ़ितनों और आज़माईशों में मुबतला होंगे. नीज़ उस ज़माने में बहोत से लोग किताबो सुन्नत के ख़िलाफ़ नई …
اور پڑھوहुदैबियह में शरीक सहाबए किराम (रज़ि.) का उच्च स्थान
क़ुर्आने मजीद में हैः لَّقَدْ رَضِيَ اللَّهُ عَنِ الْمُؤْمِنِينَ إِذْ يُبَايِعُونَكَ تَحْتَ الشَّجَرَةِ فَعَلِمَ مَا فِي قُلُوبِهِمْ فَأَنزَلَ السَّكِينَةَ عَلَيْهِمْ وَأَثَابَهُمْ فَتْحًا قَرِيبًا ﴿١٨﴾ “बेशक अल्लाह तआला उन मोमिनों से बहोत ख़ुश हुए, जब वह आप से बयअत कर रहे थे दरख़्त के नीचे और उन के दिलों में जो …
اور پڑھوसहाबए किराम (रज़ि.) ने किस तरह से अल्ललाह तआला की मदद हासिल की
शैख़ुल हदीष हज़रत मौलाना मुहमंद ज़करिय्या (रह.) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः “कभी न सोचो दुनिया क्या तरक़्क़ी कर रही है, तरक़्क़ी हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) के इत्तिबाअ में है, सहाबए किराम (रज़ि.) अपने नेज़ों को बादशाहों की क़ालीनों पर मारते थे के तुम्हारी चीज़ों की हमारे दिल में ज़र्रा …
اور پڑھوदोज़ख़ की आग से सहाबए किराम (रज़ि.) की हिफ़ाज़त
नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जहन्नम की आग उस मुसलमान को नहीं छूएगी जिस ने मुझे देखा (सहाबी) और न वह उस मुसलमान को (ताबिई) छूएगी जिस ने उन लोगों को देखा जिन्होंने मुझे देखा (सहाबी).” (सुनने तिर्मिज़ी, अर रक़म नं-३८५८) हज़रत तल्हा रज़ियल्लाहु अन्हु उहुद …
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