हज़रत ज़ैद बिन हारिसा रद़िय अल्लाहु अन्हु का अपने बाप को इन्कार हजरत ज़ैद बिन हारिसा रद़िय अल्लाहु अन्हु ज़माना-ए-जाहिलिय्यत में अपनी वालिदा (मां) के साथ ननिहाल जा रहे थे। बनू-क़ैस ने क़ाफ़िला को लूटा, जिस में ज़ैद रद़िय अल्लाहु अन्हु भी थे। उन को मक्का के बाज़ार में लाकर …
और पढ़ो »सुबह-शाम दुरूद शरीफ़ पढ़ना
عَن ابي الدرداء رضي الله عنه قال قال رسول الله صلى الله عليه و سلم مَن صَلَّى عَلَيَّ حِينَ يُصْبِحُ…
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) का दुरूद
عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللهُ عَنهُمَا أَنَّهُ كَانَ إذَا صَلَّى عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَ…
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम के बहोत ज़्यादह ख़ुश होने का कारण
عن أبي طلحة الأنصاري رضي الله عنه قال أصبح رسول الله صلى الله عليه وسلم يوما طيب النفس يرى في وجهه ا…
क़यामत के दिन नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम से ज़्यादा निकट शख़्स
عَن عَبدِ اللهِ بنِ مَسعُودٍ رَضِيَ اللهُ عَنهُ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيهِ وَ سَلَّم ق…
दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए ख़ुशख़बरी
عن عبد الرحمن بن عوف رضي الله عنه قال خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم فاتبعته حتى دخل نخلا فسجد فأط…
નવા લેખો
फज़ाइले-आमाल – २१
हज़रत हंज़ला रद़िय अल्लाहु अन्हु को निफ़ाक़ का डर हजरत हंजला रद़िय अल्लाहु अन्हु कहते हैं कि एक मर्तबा हम लोग हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम की मज्लिस में थे। हुजूरे-अक़्दस सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम ने व’अज़ (बयान,नसीहत) फ़रमाया, जिससे क़ुलूब (दिल) नर्म हो गए और आंखों से आंसू बहने लगे और …
और पढ़ो »हज़रत अबू-उबैदा रद़ियल्लाहु अन्हु पर हज़रत उमर रद़ियल्लाहु अन्हु का भरोसा
عيّن سيدنا عمر رضي الله عنه قبل موته ستة من الصحابة الكرام رضي الله عنهم وأمرهم باختيار الخليفة من بينهم، وقال حينئذ: ولو كان أبو عبيدة حيا لاستخلفته (على المسلمين) (تفسير ابن كثير ٨/٥٤) हज़रत ‘उमर रद़िय अल्लाहु अन्हु ने अपने इन्तिकाल से पहले छह सहाबा-ए-किराम रद़िय अल्लाहु अन्हुम की …
और पढ़ो »रौशनी के पेजों में दुरूद शरीफ़ लिखना
عن علي رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إن لله ملائكة خلقوا من النور لا يهبطون إلا ليلة الجمعة ويوم الجمعة بأيديهم أقلام من ذهب ودويّ من فضّة وقراطيس من نور لا يكتبون إلا الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أخرجه الديلمي وسنده ضعيف …
और पढ़ो »दुवा की सुन्नतें और आदाब – ५
(१) दुआ के शुरू में अल्लाह तआला की ह़म्द-ओ-सना बयान करें और उस के बाद नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम पर दुरूद भेजें, फिर इन्तिहाई आजिज़ी-व-ख़ाकसारी और अदब-ओ-आदर के साथ अल्लाह तआला के सामने अपनी ज़रूरतें पेश करें। हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह रद़िय अल्लाहु अन्हू फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा रसूलुल्लाह …
और पढ़ो »