‘इद्दत जब शौहर अपनी बीवी को तलाक दे दे या उसका इन्तेकाल हो जाए या दोनों मिया बीवी के निकाह को फस्ख (ख़तम करना) कर दिया जाए (बशर्ते कि शर’ई अदालत में निकाह के फस्ख करने की शर्तो का लिहाज रखा जाए) तो शरी’अत का हुक्म यह है कि बीवी …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
નવા લેખો
अदब का दारोमदार ‘उर्फ़ पर है
हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: अदब का दारोमदार सामान्य चलन पर है, ये देखा जाएगा कि ‘उफ़ में यह अदब के खिलाफ समझा जाता है या नहीं। इसी सिलसिले में याद आया कि एक मर्तबा एक खादिम को तंबीह फ़रमाई, जिन्होंने एक ही हाथ …
اور پڑھوहज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु की शान में गुस्ताखी की संगीनी
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: من سبّ عليا فقد سبّني (مسند أحمد، الرقم: ٢٦٧٤٨) जिसने ‘अली को बुरा-भला कहा, यक़ीनन उसने मुझे बूरा-भला कहा। हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के दिल में आख़िरत का ख़ौफ़ कुमैल बिन ज़ियाद रदि अल्लाहु ‘अन्हु बयान करते हैं: एक मर्तबा मैं …
اور پڑھوहज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु का बुलंद तरीन मक़ाम
नबी ए करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने एक मर्तबा हज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से फ़रमाया: ألا ترضى أن تكون مني بمنزلة هارون، من موسى إلا أنه ليس نبي بعدي (صحيح البخاري، الرقم: ٤٤١٦) क्या तुम इस बात पर राजी़ नहीं हो कि तुम मेरे लिए वैसे ही हो …
اور پڑھوहज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के लिए नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की दुआ
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक मर्तबा हज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के लिए यह दुआ फ़रमाई: اللّٰهُمَّ أَدِرِ الْحَقَّ مَعَهُ حَيْثُ دَارَ (جامع الترمذي، الرقم: ٣٧١٤) ऐ अल्लाह! हक़ को उनके साथ फेर दें, जिधर वो फिरें। हजरत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु की बहादुरी गज़व ए उहुद …
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