નવા લેખો

ज़िकर करने और सही दीनी तालीम हासिल करने की अहमियत

हज़रत मौलाना मुह़म्मद इल्यास साहब रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मैं शुरू में इस तरह जि़कर करने की तालीम देता हूं: हर नमाज़ के बाद “तस्बीहे़ फातिमा रदि अल्लाहु ‘अन्हा” और तीसरा कलिमा “سبحان الله والحمد لله ولا إلٰه إلا الله والله أكبر ولا حول ولا قوة إلا بالله” और …

اور پڑھو

हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से मोह़ब्बत करना ईमान की ‘अलामत है

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से फ़रमाया: لا يحبك إلا مؤمن، ولا يبغضك إلا منافق (أي حب سيدنا علي رضي الله عنه من علامات الإيمان، بشرط الإيمان بجميع أمور الدين الأخرى). (جامع الترمذي، الرقم: ٣٧٣٦) जो मोमिन होगा वो तुमसे मोहब्बत ही करेगा और …

اور پڑھو

क़यामत की निशानियां – क़िस्त ५

दज्जाल के बारे में अहले सुन्नत वल-जमआत का ‘अकीदा दज्जाल की जाहिर होने और उसकी फितनो का जिक्र ‘अकाईद की किताबों में आया है। ‘उलमा ए ‘अकाईद इस बात पर सहमत हैं कि दज्जाल जाहिर होने पर ईमान रखना अहले सुन्नत वल-जमात की ‘अकीदों का हिस्सा है। वो हदीसें जिनमें …

اور پڑھو

इत्तेबाए सुन्नत का एहतेमाम – ६

हजरत मुफ़्ती महमूद हसन गंगोही रहिमहुल्लाह हज़रत मुफ़्ती महमूद हसन गंगोही रहिमहुल्लाह हमारे बुजुर्गाने किराम और बड़े लोगों में से थे, जिनका ज़माना हमसे ज़्यादा दूर नहीं है। उनकी पैदाइश 1325 हिजरी में हुई और वह हज़रत शेखु-ल-ह़दीस मौलाना मुह़म्मद ज़कारिया कांधलवी रहिमहुल्लाह के अजल्ले-खुलफा में से थे। वो कई …

اور پڑھو

मैय्यत की क़ब्र

(१) मैय्यत को घर में दफन न किया जाए, चाहे वह नाबालिग हो या बालिग, नेक हो या बुरा। घर के अंदर दफ़न होना नबियों की ख़ुसूसियत (विशेषता) है। (२) क़ब्र को चौकोर बनाना मकरूह है. क़ब्र को ऊँट के कोहान की तरह थोड़ा-सा ऊँचा करना मुस्तह़ब और पसंदीदा है। …

اور پڑھو