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मासिक धर्म के दौरान तवाफ़ ज़ियारत करना

सवाल: एक महिला हाइज़ा है (मासिक धर्म से गुजर रही है) और उसे तवाफ़-ए-ज़ियारत करना है, लेकिन वह वापसी की तारीख के बाद ही हैज़ (मासिक धर्म) से पाक होगी, जबकि उसके पास फ्लाइट बुक है, तो क्या उसके लिए गुंजाइश है कि हैज़ की हालत में तवाफ़-ए-ज़ियारत कर ले …

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तवाफ़-ए-ज़ियारत को क़ुर्बानी के दिनों के बाद तक अनावश्यक रूप से स्थगित करना

सवाल: अगर हाजी ने शरई उज़र के बिना कुर्बानी के दिनों के बाद तक तवाफ़-ए-ज़ियारत को टाल दिया, तो शरीयत में इस पर क्या हुक्म है? जवाब: ज़ियारत के तवाफ़ को बिना शरई उज़्र के कुर्बानी के दिनों के बाद तक टालना जायज़ नहीं है। अगर कोई देर करेगा तो …

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ज़ियारत या उमरा का तवाफ़ बिना वज़ू किए करना

सवाल: अगर कोई शख्स बिना वुज़ू किये तवाफ़-ए-ज़ियारत या उमरे का तवाफ़ करे, तो शरीयत में उस का क्या हुक्म है? उत्तर: उस पर एक दम वाजिब होगा; अलबत्ता, अगर वह उस तवाफ़ को दोहरा ले, जो उसने वुज़ू के बगैर किया था, तो उस से दम गिर जाएगा। अल्लाह …

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तवाफ़ के दौरान वुज़ू तोड़ना

सवाल: अगर तवाफ़ करते समय किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को क्या करना चाहिये? जवाब: अगर तवाफ के दौरान किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को चाहिये कि वह फौरन फिर से वुज़ू करे और दोबारा तवाफ़ शुरू करे। अगर वह चाहे तो वह उसी …

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प्रस्तावना

अल्लाह त’आला ने इन्सानों को बेशुमार नेमतों से नवाज़ा है और अल्लाह त’आला की हर नेमत बहुत बड़ी है, लेकिन दीन की नेमत सबसे बड़ी और ‘अज़ीम नेमत है; क्योंकि दीन ही के ज़रिए इन्सान को आखिरत में नजात मिलेगी, उसको जहन्नम के हमेशा के अज़ाब से छुटकारा मिलेगा और …

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