सवाल: एक महिला हाइज़ा है (मासिक धर्म से गुजर रही है) और उसे तवाफ़-ए-ज़ियारत करना है, लेकिन वह वापसी की तारीख के बाद ही हैज़ (मासिक धर्म) से पाक होगी, जबकि उसके पास फ्लाइट बुक है, तो क्या उसके लिए गुंजाइश है कि हैज़ की हालत में तवाफ़-ए-ज़ियारत कर ले …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
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तवाफ़-ए-ज़ियारत को क़ुर्बानी के दिनों के बाद तक अनावश्यक रूप से स्थगित करना
सवाल: अगर हाजी ने शरई उज़र के बिना कुर्बानी के दिनों के बाद तक तवाफ़-ए-ज़ियारत को टाल दिया, तो शरीयत में इस पर क्या हुक्म है? जवाब: ज़ियारत के तवाफ़ को बिना शरई उज़्र के कुर्बानी के दिनों के बाद तक टालना जायज़ नहीं है। अगर कोई देर करेगा तो …
اور پڑھوज़ियारत या उमरा का तवाफ़ बिना वज़ू किए करना
सवाल: अगर कोई शख्स बिना वुज़ू किये तवाफ़-ए-ज़ियारत या उमरे का तवाफ़ करे, तो शरीयत में उस का क्या हुक्म है? उत्तर: उस पर एक दम वाजिब होगा; अलबत्ता, अगर वह उस तवाफ़ को दोहरा ले, जो उसने वुज़ू के बगैर किया था, तो उस से दम गिर जाएगा। अल्लाह …
اور پڑھوतवाफ़ के दौरान वुज़ू तोड़ना
सवाल: अगर तवाफ़ करते समय किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को क्या करना चाहिये? जवाब: अगर तवाफ के दौरान किसी शख्स का वुज़ू टूट जाये, तो उस को चाहिये कि वह फौरन फिर से वुज़ू करे और दोबारा तवाफ़ शुरू करे। अगर वह चाहे तो वह उसी …
اور پڑھوप्रस्तावना
अल्लाह त’आला ने इन्सानों को बेशुमार नेमतों से नवाज़ा है और अल्लाह त’आला की हर नेमत बहुत बड़ी है, लेकिन दीन की नेमत सबसे बड़ी और ‘अज़ीम नेमत है; क्योंकि दीन ही के ज़रिए इन्सान को आखिरत में नजात मिलेगी, उसको जहन्नम के हमेशा के अज़ाब से छुटकारा मिलेगा और …
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