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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम के साथ हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु की क़ुरबत (नज़दीकी)

عن سيدنا أبي موسى الأشعري رضي الله عنه أنه قال: قدمت أنا وأخي من اليمن (إلى المدينة المنورة)، فمكثنا حينا ما نرى ابن مسعود وأمه إلا من أهل البيت، من كثرة دخولهم ولزومهم له (صحيح البخاري، الرقم: ٤٣٨٤) हज़रत अबू-मूसा अशअ़री रज़ि‍यल्लाहु अ़न्हु बयान करते हैं: “जब मैं और मेरा …

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बे-पर्दगी के ख़तरनाक नताइज (रिज़ल्ट)

हज़रत मौलाना अशरफ़ अ़ली थानवी रह़मतुल्लाहि अ़लैहि ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: “जी हाँ! आज-कल बे-पर्दगी का ज़ोर है। बड़े फ़ित्ने का ज़माना है। यह एतिराज़ किया जाता है कि यह पर्दा औरतों को क़ैद में रखना है। मैं कहता हूँ कि यह क़ैद नहीं; बल्कि हिफ़ाज़त है, जो हर …

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फज़ाइले-आमाल – ४०

हज़रत अली रजि० का एक क़ब्र पर गुज़र कुमैल रजि० एक शख्स हैं, कहते हैं कि मैं हज़रत अली कर्रमल्लाहु बज्हहू के साथ एक मर्तबा जा रहा था। वह जंगल में पहुंचे, फिर एक मक्बरे की तरफ़ मुतवज्जह हुए और फ़रमाया: ऐ मक्बरे वालो! ऐ बोसीदगी वालो! एक वहशत और …

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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही व-सल्लम को दुरूद पहोंचाने वाला फ़रिश्ता

عن عمار بن ياسر رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: إن الله وكل بقبري ملكا أعطاه الله أسماء الخلائق فلا يصلي علي أحد إلى يوم القيامة إلا أبلغني باسمه واسم أبيه هذا فلان بن فلان قد صلى عليك (رواه البزار كما في الترغيب والترهيب، الرقم: …

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फज़ाइले-आमाल – ३९

हज़रत अली बिन माबद रह का किराये के मकान से तहरीर को ख़ुश्क करना अली बिन माबद रह० एक मुहद्दिस हैं, फर्माते हैं, मैं एक किराये के मकान में रहता था। एक मर्तबा मैंने कुछ लिखा और उसको खुश्क करने के लिए मिट्टी की _ ज़रूरत हुई कच्ची दीवार थी। …

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