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बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना

सवाल: क्या बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है? जवाब: बगैर वुज़ू के मस्जिद में दाखिल होना जायज़ है; मगर मस्जिद के आदाब में से है कि आदमी मस्जिद में बा-वुज़ू दाखिल हो और जब तक मस्जिद में रहे बा-वुज़ू रहे। अल्लाह तआला ज्यादह जानने वाले हैं. وَمَن …

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मरीज़ की इयादत की सुन्नतें और आदाब – ​​१

मरीज से इयादत दीने-इस्लाम इस बात का हुक्म देता है कि इन्सान अल्लाह तआला के हुकूक और उसके बंदों के हुकूक को पूरा करे। बंदों के जो हुकूक इन्सान पर लाज़िम हैं, उनकी दो किस्म हैं: पहली किस्म = जो हर एक पर इन्फिरादी तौर पर लाज़िम हैं। उदाहरण के …

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सजदे में दुआ‎ करना

सवाल: सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ों के सजदे में कौन सी दुआएं पढ़ सकता हूं? और, क्या नफ़्ल नमाज़ के सजदे में अंग्रेज़ी में दुआ मांग सकता हूं? जवाब: १. सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ों के सजदे में आप वो तमाम दुआएं जो क़ुरान और हदीस में पाई जाती है अरबी ज़बान …

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रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम का मुबारक नाम सुन कर दुरूद पढ़ने का षवाब

हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के “जिस व्यक्ति के सामने मेरा वर्णन किया जाए, उस को मुझ पर दुरूद भेजना चाहिए, इसलिए के जो मुझ पर एक बार दुरूद भेजता है, अल्लाह तआला उस पर दस बार दुरूद (रहमतें) भेजते हैं.”...

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हज़रत सईद बिन-ज़ैद रद़ियल्लाहु अन्हु का बुलंद मक़ाम

قال سعيد بن جبير رحمه الله: كان مقام أبي بكر وعمر وعثمان وعليّ وسعد وسعيد وطلحة والزّبير وعبد الرّحمن بن عوف رضي الله عنهم مع النّبي صلّى اللَّه عليه وسلم واحدًا، كانوا أمامه في القتال (يدافعون عنه صلى الله عليه وسلم ويحفظونه)، وخلفه (مباشرة) في الصلاة (أي: في الصف المتقدم) (الإصابة ٣/٨٧) …

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