हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: وأصدقهم (أمتي) حياء عثمان (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٩١) मेरी उम्मत में सबसे ज्यादा हया-दार शख्स उस्मान बिन अफ्फान हैं। हज़रत उस्मान रदि अल्लाहु अन्हु की हया हज़रत आयशा रदि अल्लाहु अन्हा फ़रमाती हैं: एक दफा नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे …
اور پڑھوवफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना
ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा…
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मु…
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इत्तिबा’-ए-सुन्नत का एहतिमाम- ५
हज़रत शेखुल-हिन्द मौलाना महमूदुल-हसन देवबंदी रहिमहुल्लाह हज़रत शेखुल-हिन्द मौलाना महमूदुल-हसन देवबंदी रहिमहुल्लाह हिन्दुस्तान के एक जलीलुल-क़द्र आलिमे दीन थे। उन की विलादत (पैदाइश) सन हिजरी १२६८ में (सन इस्वी १८५१) हुई। उन का सिलसिला-ए-नसब (खानदानी सिलसिला) हज़रत उस्मान रदि अल्लाहु अन्हु तक पहुंचता है और वो दारुल उलूम देवबंद के …
اور پڑھوनबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दिल में हज़रत उस्मान रदि अल्लाहु अन्हु की बेपनाह मोहब्बत
हज़रत अली रदि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़रमाते हुए सुना: لو أن لي أربعين بنتا زوّجت عثمان واحدة بعد واحدة، حتى لا يبقى منهن واحدة (أي بعد وفاة واحدة، لزوّجته أخرى حتى لا تبقى واحدة منهن) (أسد الغابة ٣/٢١٦) अगर मेरी चालीस …
اور پڑھوतलाक की सुन्नतैं और आदाब – ६
खुला अगर मियां बीवी के दरम्यान सुलह मुमकिन न हो और शौहर तलाक देने से इनकार करे, तो बीवी के लिए जायज़ है कि वह शौहर को कुछ माल या अपना महर दे दे और उसके बदले तलाक ले ले। अगर शौहर ने अभी तक महर अदा नहीं किया है, …
اور پڑھوअपनी शरीके हयात (बीवी) के साथ हिजरत करने वाला पेहला शख्स
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम ने एरशाद फरमाया: إن عثمان لأول من هاجر إلى الله بأهله بعد لوط बेशक उसमान पेहले शख्स है जिन्होंने अपनी बीवी के साथ अल्लाह तआला के रास्ते हिजरत की नबी इब्राहीम और नबी लूत अलैहिमुस्सलाम के बाद। પત્ની સાથે સ્થળાંતર કરનાર પ્રથમ મુસ્લિમ હઝરત અનસ …
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