नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: لا ينبغي لقوم فيهم أبو بكر أن يؤمهم غيره (سنن الترمذي، الرقم: ٣٦٧٣) जिस मज्मा’ में अबू बकर रदी अल्लाहु अन्हु मौजूद हों, वहां अबू बकर के अलावा किसी और के लिए मुनासिब नहीं है कि वह नमाज़ में लोगों की …
اور پڑھوहज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) – मोअज़िनों के सरदार
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: نعم المرء بلال، ولا يتبعه إلا مؤمن، وهو سيد المؤذنين (من أمتي)، وا…
फ़रिश्तों का नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में दुरूदो सलाम पहोंचाना
“नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की उम्मत में से जो शख़्स भी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम)…
जुम्आ के दिन कषरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की दुआ
हज़रत उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया …
दुरूद शरीफ़ जमा करने के लिए फ़रिश्तों का दुनिया में सैर करना
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाय…
दुआ से पेहले दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) …
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नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम के नजदीक सब से ज्यादा महबूब
سئل سيدنا رسول الله صلى الله عليه وسلم مرة فقيل: يا رسول الله، أي الناس أحب إليك؟ قال: عائشة، قيل: من الرجال؟ قال: أبوها (سنن ابن ماجة، الرقم: ١٠١) एक मर्तबा नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सवाल किया गया: ऐ अल्लाह के रसूल! लोगों में आप को …
اور پڑھوअल्लाह ताला हजरत अबू बकर रदि अल्लाहु अन्हु को कयामत के दिन अज्र-ओ-षवाब अता फरमायेंगे
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया ما لأحد عندنا يد إلا وقد كافيناه ما خلا أبا بكر فإن له عندنا يدا يكافئه الله به يوم القيامة (سنن الترمذي، الرقم: ٣٦٦١) जिस ने भी हमारे साथ कोई एहसान किया, हम ने उसका बदला (इस दुनिया में) दे दिया सिवाए …
اور پڑھوहज़रत जिब्रील अलयहि अल-सलाम की तरफ से “अस्-सिदीक” का लकब
हज़रत रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मैराज की रात हज़रत जिब्रील अलयहि अल-सलाम से फरमाया: إن قومي لا يصدقوني (إذا أخبرتهم بأنه قد أسري بي)، فقال له جبريل: يصدقك أبو بكر، وهو الصديق (المعجم الأوسط للطبراني، الرقم: ٧١٧٣) मेरी कौम मेरी तस्दीक़ नहीं करेगी (जब मैं उन्हैं मैराज के …
اور پڑھوशुक्र और नाशुक्री की बुनियाद
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी (रहिमहुल्लाह) ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमायाः इन्सान के दिल में नाशुक्री इस से पैदा होती है कि आदमी अल्लाह की मौजूदा और जो हासिल है उस ने’मतो पर तो नजर न करे और जो चीज हासिल नहीं, सिर्फ उसको देखता रहे। इसके बरखिलाफ (विपरीत) जो …
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