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फज़ाइले-आमाल – १०

दूसरा बाब: अल्लाह जल्ल जलालुहू व ‘अम्म नवालुहू का ख़ौफ़ और डर दीन के साथ इस जांफ़िशानी के (जान छिड़कने के) बावजूद, जिसके क़िस्से अभी गुज़रे और दीन के लिए अपनी जान व माल, आबरू सब कुछ फ़ना कर देने के बाद जिसका नमूना अभी आप देख चुके हैं, अल्लाह …

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हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू के लिए रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैही व-सल्लम की खुसूसी दुआ

عن سيدنا الزبير رضي الله عنه أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: من يأت بني قريظة فيأتيني بخبرهم. فانطلقتُ، فلما رجعت، جمع لي رسول الله صلى الله عليه وسلم أبويه فقال: فداك أبي وأمي (صحيح البخاري، الرقم: ٣٧٢٠) हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू बयान करते हैं कि एक …

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फज़ाइले-आमाल – ९

हज़रत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हू का क़िस्सा हज़रत उमर रद़िय अल्लाहु अन्हू जिनके पाक नाम पर आज मुसलमानों को फख्र है। और जिनके जोशे-ईमानी से आज तेरह सौ वर्ष बाद तक काफ़िरों के दिल में ख़ौफ़ है, इस्लाम लाने से क़ब्ल मुसलमानों के मुक़ाबले और तकलीफ़ पहुंचाने में भी मुमताज़ …

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अमल और मेहनत के बगैर कोई चारा नहीं है

शेख-उल-हदीस हजरत मौलाना मुहम्मद ज़करिया रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मेरा प्यारो! कुछ कर लो। مَنْ طَلَبَ الْعُلى سَهِرَ الَّیَالِيَ जो शख़्स कुछ बनना चाहे, तो उस को रातों में जागना पड़ता है। फरमाया: एक शख्स थे, जो कुछ रोज़ हजरत रायपुरी रहिमहुल्लाह की खिदमत में रहे, ज़िक्र-ओ-अज़कार में …

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फज़ाइले-सदकात – ८

‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात तीसरी अलामत तीसरी अलामत यह है कि ऐसे ‘उलूम में मशगूल हो जो आख़िरत में काम आने वाले हों, नेक कामों में रग्बत पैदा करने वाले हों, ऐसे उलूम से इह़्तिराज़ करे (बचें) जिनका आख़िरत में कोई नफा नहीं है या नफा कम है। हम लोग …

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