हज़रत मौलाना अशरफ़ ‘अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: अदब का दारोमदार सामान्य चलन पर है, ये देखा जाएगा कि ‘उफ़ में यह अदब के खिलाफ समझा जाता है या नहीं। इसी सिलसिले में याद आया कि एक मर्तबा एक खादिम को तंबीह फ़रमाई, जिन्होंने एक ही हाथ …
اور پڑھوवफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना
ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा…
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मु…
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हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु की शान में गुस्ताखी की संगीनी
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: من سبّ عليا فقد سبّني (مسند أحمد، الرقم: ٢٦٧٤٨) जिसने ‘अली को बुरा-भला कहा, यक़ीनन उसने मुझे बूरा-भला कहा। हज़रत ‘अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के दिल में आख़िरत का ख़ौफ़ कुमैल बिन ज़ियाद रदि अल्लाहु ‘अन्हु बयान करते हैं: एक मर्तबा मैं …
اور پڑھوहज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु का बुलंद तरीन मक़ाम
नबी ए करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने एक मर्तबा हज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु से फ़रमाया: ألا ترضى أن تكون مني بمنزلة هارون، من موسى إلا أنه ليس نبي بعدي (صحيح البخاري، الرقم: ٤٤١٦) क्या तुम इस बात पर राजी़ नहीं हो कि तुम मेरे लिए वैसे ही हो …
اور پڑھوहज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के लिए नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की दुआ
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक मर्तबा हज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के लिए यह दुआ फ़रमाई: اللّٰهُمَّ أَدِرِ الْحَقَّ مَعَهُ حَيْثُ دَارَ (جامع الترمذي، الرقم: ٣٧١٤) ऐ अल्लाह! हक़ को उनके साथ फेर दें, जिधर वो फिरें। हजरत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु की बहादुरी गज़व ए उहुद …
اور پڑھوदीनी इदारों की तौहीन करने से परहेज़ करें
शेखुल-हदीस हजरत मौलाना मुह़म्मद ज़करिया रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: मेरे प्यारो! एक बहुत ही ज़रूरी और अहम बात कहना चाहता रहा; मगर अब तक न केह सका. तुम उलमा ए किराम हो, मुदर्रिस हो, बहुत से मदरसों के नाज़िम भी होंगे, ये मदारिस तुम्हारी बरकत से चल रहे …
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