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हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू का अल्लाह तआला की राह में ज़ख़्मी होना

हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू ने अपने बेटे अब्दुल्लाह से फरमाया: ما مني عضو إلا وقد جرح مع رسول الله صلى الله عليه وسلم (مجاهدا في سبيل الله) (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٤٦) मेरा कोई उज़्व (शरीर का कोई भाग) एसा नहीं है, जो ज़ख़्मी न हुआ हो जंग में रसूलुल्लाह …

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फज़ाइले-सदकात – ९

‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात चौथी अलामत: चौथी अलामत आख़िरत के उलमा की यह है कि खाने पीने की और लिबास की उम्दगियों और बेहतराईयों की तरफ मुतवज्जह न हो, बल्कि इन चीज़ों में दरमियानी रफ़्तार इख़्तियार करे और बुजुर्गों के तर्ज़ को इख़्तियार करे। इन चीज़ों में जितना कमी की …

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ख़ानक़ाही लाइन में राहज़न चीजें

हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मैं खैर ख्वाही से अर्ज़ करता हूँ, सब सुन लें। याद रखने की बात है कि इस तरीक़ में दो चीजें तालिब के लिए राहज़न और कातिल ज़हर हैं। एक: तावील अपनी गलती की और दूसरी: अपने मुअल्लिम (पीर,शेख,हज़रत) …

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हजरत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू की दरियादिली

حدثني مغيث بن سمي قال: كان للزبير بن العوام رضي الله عنه، ألف مملوك يؤدي إليه الخراج فلا يدخل بيته من خراجهم شيئا (السنن الكبرى، الرقم: 15787) मुग़ीस बिन सुमय रहिमहुल्लाह कहते हैं: हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू के एक हज़ार गुलाम थे, जो कमाते थे और अपनी कमाई हज़रत …

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बागे-मुहब्बत (तैंतीसवाँ एपिसोड)

नेक,सालेह आलिम से मशवरा करने की अहमियत “हर फन में उसके माहिर लोगों से मशवरा तलब करना” एक उसूल और ज़ाब्ता है, जो आम तौर पर बयान किया जाता है और जिंदगी के तमाम मरहलों में उस पर अमल किया जाता है। मिसाल के लिए, सोचें कि एक शख़्स अपने …

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