हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू ने अपने बेटे अब्दुल्लाह से फरमाया: ما مني عضو إلا وقد جرح مع رسول الله صلى الله عليه وسلم (مجاهدا في سبيل الله) (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٤٦) मेरा कोई उज़्व (शरीर का कोई भाग) एसा नहीं है, जो ज़ख़्मी न हुआ हो जंग में रसूलुल्लाह …
اور پڑھوगुलामों को आज़ाद करने से अफ़ज़ल
عن أبي بكر رضي الله عنه قال: الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم أمحق للخطايا من الماء للنار والسلام…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अ़लैहि व-सल्लम से हज़रत अ़ब्दुल्लाह बिन-मसऊ़द रज़ियल्लाहु अ़न्हु की मुशाबहत
سئل سيدنا حذيفة رضي الله عنه عن أقرب الناس سمتا برسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: ” كان أشب…
ताज़ियत की सुन्नतें और आदाब – २
(१) ताज़ियत का मतलब यह है कि मय्यित के रिश्तेदारो और अज़ीज़ों को उन की मुसीबत पर तसल्ली दी जाए और उन…
हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व-सल्लम की लानत
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: رغم أنف رجل ذكرت عنده فلم يصل علي، …
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व-सल्लम को फ़रिश्तों के ज़रिए दुरूद शरीफ़ के बारे में ख़बर पड़ना
عن أبي هريرة رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم من صلى علي عند قبري سمعته ومن صلى عل…
નવા લેખો
फज़ाइले-सदकात – ९
‘उलमा-ए-आख़िरत की बारह अलामात चौथी अलामत: चौथी अलामत आख़िरत के उलमा की यह है कि खाने पीने की और लिबास की उम्दगियों और बेहतराईयों की तरफ मुतवज्जह न हो, बल्कि इन चीज़ों में दरमियानी रफ़्तार इख़्तियार करे और बुजुर्गों के तर्ज़ को इख़्तियार करे। इन चीज़ों में जितना कमी की …
اور پڑھوख़ानक़ाही लाइन में राहज़न चीजें
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रह़िमहुल्लाह ने एक मर्तबा इर्शाद फरमाया: मैं खैर ख्वाही से अर्ज़ करता हूँ, सब सुन लें। याद रखने की बात है कि इस तरीक़ में दो चीजें तालिब के लिए राहज़न और कातिल ज़हर हैं। एक: तावील अपनी गलती की और दूसरी: अपने मुअल्लिम (पीर,शेख,हज़रत) …
اور پڑھوहजरत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू की दरियादिली
حدثني مغيث بن سمي قال: كان للزبير بن العوام رضي الله عنه، ألف مملوك يؤدي إليه الخراج فلا يدخل بيته من خراجهم شيئا (السنن الكبرى، الرقم: 15787) मुग़ीस बिन सुमय रहिमहुल्लाह कहते हैं: हज़रत ज़ुबैर रद़िय अल्लाहु अन्हू के एक हज़ार गुलाम थे, जो कमाते थे और अपनी कमाई हज़रत …
اور پڑھوबागे-मुहब्बत (तैंतीसवाँ एपिसोड)
नेक,सालेह आलिम से मशवरा करने की अहमियत “हर फन में उसके माहिर लोगों से मशवरा तलब करना” एक उसूल और ज़ाब्ता है, जो आम तौर पर बयान किया जाता है और जिंदगी के तमाम मरहलों में उस पर अमल किया जाता है। मिसाल के लिए, सोचें कि एक शख़्स अपने …
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