जो शख्स ऐसे लोगों को सलाह देता है जो दीन से दूर हैं और उनके पास दीन की सही समझ नहीं है, तो उसके लिए ज़रूरी है कि वह उनके साथ नरमी से बात करे। नरमी से बात करने के साथ साथ उसको चाहिए कि वो किसी भी तरीके से …
اور پڑھوवफ़ात से पहले हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु की आखिरी बातें
لما احتضر سيدنا بلال رضي الله عنه قال: غدا نلقي الأحبة، محمدا وحزبه فقالت له امرأته حزينة: واويلاه! …
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) का विशेष दुरूद
अबु बकर बिन मुजाहिद अल मुक़री नव मौलूद के वालिद के साथ उठे. वज़ीर के दरवाज़े पर पहोंचे. अबु बकर ने व…
ग़फ़लत की जगहों में दुरूद शरीफ़ पढ़ना
“ए मेरे भतीजे ! मेरी किताब “अश शिफ़ा बितअरीफ़ि हुक़ूक़िल मुस्तफ़ा” को मज़बूती से पकड़ लो और उस को अल…
अज़ान के बाद दुरूद शरीफ पढ़ना
ए अल्लाह ! मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) को “वसीला”(पूरी उम्मत के लिए सिफ़ारिश का हक़) अता फ़रमा…
दुरूद शरीफ़ पढ़ने की बरकत से अस्सी साल के गुनाहों की माफ़ी और पुल सिरात पर रोशनी
हज़रत अबु हुरैरह (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया के मु…
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नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और हज़रत अली रदि अल्लाहु ‘अन्हु के दरम्यान इंतिहाई गेहरा ताल्लुक़
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने हज़रत फातिमा रदि अल्लाहु ‘अन्हा से फ़रमाया: إني وإياك وهذا النائم – يعني عليا – وهما – يعني الحسن والحسين – لفي مكان واحد يوم القيامة (أي في الجنة) (المستدرك للحاكم، الرقم: ٤٦٦٤) क़यामत के दिन बेशक मैं और तुम और ये शख्स जो …
اور پڑھوसूरह लहब की तफसीर
تَبَّتْ يَدا أَبِىْ لَهَبٍ وَّتَبَّ ﴿١﴾ مَا أَغْنىٰ عَنْهُ مَالُهُ وَمَا كَسَبَ ﴿٢﴾ سَيَصْلىٰ نَارًا ذَاتَ لَهَبٍ ﴿٣﴾ وَامْرَاَتُهُ حَمَّالَةَ الحَطَبِ ﴿٤﴾ فِىْ جِيْدِهَا حَبْلٌ مِنْ مَسَدٍ ﴿٥﴾ अबू लहब के हाथ टूट जाएं और वो बर्बाद हो जाए (१) न उस का माल उसके काम आया और न उसकी कमाई (२) वह जल्द ही भड़कते शो’लों वाली आग …
اور پڑھوअल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु ‘अलैहि वसल्लम से मोहब्बत करने वाला
गज़व ए ख़ैबर के मौके पर, नबी ए करीम सल्लल्लाहु ‘अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: لأعطين الراية غدا رجلا يفتح على يديه، يحبّ الله ورسوله، ويحبّه الله ورسوله. في الغد، دعا رسول الله صلى الله عليه وسلم عليا وأعطاه الراية (من صحيح البخاري، الرقم: ٣٠٠٩) कल, मैं झंडा उस शख्स …
اور پڑھو‘इद्दत की सुन्नतें और आदाब – १
‘इद्दत जब शौहर अपनी बीवी को तलाक दे दे या उसका इन्तेकाल हो जाए या दोनों मिया बीवी के निकाह को फस्ख (ख़तम करना) कर दिया जाए (बशर्ते कि शर’ई अदालत में निकाह के फस्ख करने की शर्तो का लिहाज रखा जाए) तो शरी’अत का हुक्म यह है कि बीवी …
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