صعد النبي صلى الله عليه وسلم جبل أحد ومعه سيدنا أبو بكر رضي الله عنه وسيدنا عمر رضي الله عنه وسيدنا عثمان رضي الله عنه. فرجف أحد (من شدة الفرح بوضع هؤلاء الأجلاء أقدامهم عليه)، فضرب سيدنا رسول الله صلى الله عليه وسلم الجبل برجله وقال: اسكن أحد، فليس عليك …
اور پڑھوहज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) – मोअज़िनों के सरदार
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: نعم المرء بلال، ولا يتبعه إلا مؤمن، وهو سيد المؤذنين (من أمتي)، وا…
फ़रिश्तों का नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ख़िदमत में दुरूदो सलाम पहोंचाना
“नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की उम्मत में से जो शख़्स भी नबीए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम)…
जुम्आ के दिन कषरत से दुरूद शरीफ़ पढ़ने वाले के लिए नबिए करीम (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) की दुआ
हज़रत उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि.) से रिवायत है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया …
दुरूद शरीफ़ जमा करने के लिए फ़रिश्तों का दुनिया में सैर करना
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) से मरवी है के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाय…
दुआ से पेहले दुरूद शरीफ़ पढ़ना
हज़रत फ़ुज़ाला बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) फ़रमाते हैं के एक मर्तबा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम) …
નવા લેખો
लोगों की इस्लाह के वक्त रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अंदाज
अम्र बिल मारूफ और नही ‘अनिल मुन्कर ( नेक कामों का हुकम देना और बुरे कामों से रोकना) दीन का एक अहम फ़रीज़ा (कर्तव्य) है; लेकिन इन्सान के लिए जरूरी है कि वह जिस की इस्लाह करना चाहता है उसके बारे में उसको इल्म हो, नीज़ उस को यह भी …
اور پڑھوहज़रत उस्मान रदि अल्लाहु ‘अन्हु की शहादत की पेशीन-गोई
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक खास फितने का जिक्र किया और हज़रत उस्मान रदि अल्लाहु ‘अन्हु के बारे में फ़रमाया: يقتل هذا فيها مظلوما لعثمان (سنن الترمذي، الرقم: ٣٧٠٨) ये शख्स इस फितने में मज़लूम क़त्ल किया जाएगा। (पेशीन-गोई=वक्त से पहले किसी वाकिऐ का बयान करना) हज़रत उस्मान रदि …
اور پڑھوहज़रत उस्मान रदि अल्लाहु अन्हु के बुलंद अख्लाक
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी साहिबजादी हज़रत रुक़य्या रदि अल्लाहु अन्हा से इर्शाद फ़रमाया: يا بنية: أحسني إلى أبي عبد الله (عثمان)، فإنه أشبه أصحابي بي خلقا (المعجم الكبير للطبراني، الرقم: ٩٨) ऐ मेरी प्यारी बेटी! अपने शौहर उस्मान की खिदमत करना; क्यूंकि वो मेरे सहाबा में …
اور پڑھوदीन-ओ-ईमान की हिफाजत का तरीका
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी रहिमहुल्लाह ने एक मर्तबा इरशाद फ़रमाया: हातिम असम फ़रमाते हैं कि जब तक कुछ हिस्सा क़ुरान शरीफ़ का और कुछ हिस्सा अपने सिलसिले के मुर्शीद-ओ-बुजुर्ग के मल्फ़ूज़ात-ओ-हिकायत का न पढ़ा जाए, तब तक ईमान की सलामती नज़र नहीं आती। (मुर्शीद=शेख, हिदायत वाला सीधा रास्ता बताने …
اور پڑھو
Alislaam.com – اردو हिन्दी ગુજરાતી